वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) बजट (Budget 2022) में रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के लिए बड़े ऐलान कर सकती हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार का फोकस क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने पर है। पिछले साल जलवायु सम्मेलन (COP26) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में कमी के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य का ऐलान किया था। इसलिए बजट में वित्त मंत्री रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर लिए स्कीम का ऐलान कर सकती हैं।
एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों के लिए वायबिलिटी-गैप फंडिंग या ग्रांट का ऐलान बजट में हो सकता है। सरकार ऑफशोर विंड पावर प्लांट्स (Wind Power Plants) कंपनियों के लिए भी इनसेंटिव की घोषणा कर सकती है। देश के उत्तरपूर्वी इलाके में हाइड्रोपावर पोजेक्ट्स शुरू करने के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। इसके अलावा नए ट्रांसमिशन पावर लाइन के लिए भी बड़े फंड का प्रस्ताव बजट में आ सकता है।
जानकारों का मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के लिए बैटर स्वैपिंग की ढांचागत सुविधाएं बनाने के लिए भी इनसेंटिव दे सकती हैं। पिछले साल सरकार ने बैटरी मैन्युफैक्चरर्स के लिए 18,100 करोड़ रुपये की पीएलआई स्कीम पेश की थी। सरकार का मानना है कि इससे बैटरी का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, जिससे इसके आयात पर हमारी निर्भरता घटेगी। इससे देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electrical Vehicles) का इस्तेमाल भी बढ़ाने में हेल्प मिलेगी।
पिछले साल नवंबर में COP26 जलवायु सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि साल 2030 तक देश में कुल बिजली का आधा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से आएगा। उन्होंने देश में स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता भी बढ़ाकर 500 गीगावाट करने की बात कही थी। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगले आठ साल तक हर साल क्षमता में सालाना 42 गीगावाट की वृद्धि करनी पड़ेगी।
कुछ जानकारों का मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने में सरकार पिछड़ती दिख रही है। इसकी वजह यह है कि उसे इस काम में राज्य सरकारों का पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। अगर राज्य सरकारें भी रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने पर फोकस करें तो सरकार के लिए लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा।
केंद्र का मानना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी। इससे पेट्रोलियम आयात पर देश की निर्भरता भी घटेगी। इंडिया अपनी जरूरत के 80 फीसदी पेट्रोलियम का आयात करता है। इस पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। साथ ही पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल से पॉलूशन भी बढ़ता है।