CoinSwitch ने लॉन्च किया 'DigiVault', अब क्रिप्टो कस्टडी को लेकर नहीं होगी कोई चिंता! HNIs और संस्थागत निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदा

CoinSwitch-DigiVault: भारत में क्रिप्टो का चलन अब केवल आम रिटेल निवेशकों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि बड़े व्यापारिक घराने और संस्थान भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। लेकिन भारत में एक ऐसी सुरक्षित और स्थानीय नियमों के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी, जहां ये बड़े निवेशक अपनी डिजिटल संपत्ति सुरक्षित रख सकें

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 4:05 PM
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DigiVault रियल-वर्ल्ड एसेट्स जैसे- प्रॉपर्टी या बॉन्ड्स के टोकनाइजेशन में मदद करेगा, जिससे भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी

CoinSwitch-DigiVault: भारत के सबसे बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म CoinSwitch ने आज एक नई सर्विस 'DigiVault' लॉन्च किया है। यह एक स्पेशल 'क्रिप्टो कस्टडी' फैसिलिटी है, जिसे मुख्य रूप से हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs), फैमिली ऑफिस, संस्थानों और Web3 कंपनियों के लिए डिजाइन किया गया है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्या है DigiVault और क्यों पड़ी इसकी जरूरत।

क्यों पड़ी DigiVault की जरूरत?

भारत में क्रिप्टो का चलन अब केवल आम रिटेल निवेशकों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि बड़े व्यापारिक घराने और संस्थान भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। लेकिन भारत में एक ऐसी सुरक्षित और स्थानीय नियमों के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी, जहां ये बड़े निवेशक अपनी डिजिटल संपत्ति सुरक्षित रख सकें। DigiVault इसी कमी को पूरा करेगा।


DigiVault कैसे करेगा काम?

DigiVault रियल-वर्ल्ड एसेट्स जैसे- प्रॉपर्टी या बॉन्ड्स के टोकनाइजेशन में मदद करेगा, जिससे भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह से भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट(FIU-IND) के दिशानिर्देशों और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों का पालन करता है। इसमें KYC के साथ-साथ ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम भी है। CoinSwitch ने DigiVault सर्विस के डिजिटल एसेट सुरक्षा में दुनिया की अग्रणी कंपनी Fireblocks के साथ साझेदारी की है। यह 'मल्टी-पार्टी कम्प्यूटेशन' (MPC) तकनीक का उपयोग करता है, जिससे साइबर खतरों का जोखिम कम हो जाता है।

किसे होगा इसका फायदा?

HNIs और फैमिली ऑफिस: वे अपनी भारी-भरकम क्रिप्टो होल्डिंग्स को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे और अपनी इच्छा अनुसार कंट्रोल विड्रॉल कर पाएंगे।

संस्थान और कंपनियां: कॉरपोरेट्स और फंड्स के लिए इसमें 'ट्रेजरी मैनेजमेंट' और कई स्तरों वाली मंजूरी की सुविधा है।

Web3 डेवलपर्स: नए एप्लिकेशन बनाने वाले डेवलपर्स को तैयार API और वॉलेट इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे वे तेजी से और सुरक्षित प्रोडक्ट बना सकेंगे।

क्या बोले CoinSwitch के को-फाउंडर?

DigiVault के लॉन्च पर CoinSwitch के को-फाउंडर आशिष सिंघल ने कहा, 'पिछले 12-18 महीनों में हमने देखा है कि भारत का क्रिप्टो इकोसिस्टम अब मैच्योर हो रहा है। बड़े निवेशक और फैमिली बिजनेस अब इसमें शामिल हो रहे हैं। वैसे तो DigiVault को शुरुआत में हमने अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए बनाया था, लेकिन बाजार की मांग को देखते हुए अब हम इसे बाहरी संस्थानों के लिए भी खोल रहे हैं।'

आपको बता दें कि 2017 में एस्टेब्लिश CoinSwitch 2.5 करोड़ से ज्यादा यूजर्स के साथ भारत का सबसे बड़ा क्रिप्टो प्लेटफॉर्म है। इसे a16z, कॉइनबेस वेंचर्स, टाइगर ग्लोबल और सिकोइया कैपिटल जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों का समर्थन प्राप्त है। यह ISO प्रमाणित है और भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU-IND) के साथ रजिस्टर्ड है।

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