Core Sector: मार्च में भारत के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में 0.4% की गिरावट दर्ज हुई। यह करीब दो साल का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। फरवरी में जहां इन सेक्टरों में 2.8% की बढ़त थी, वहीं मार्च में गिरावट दर्ज हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है।
कोयला, कच्चा तेल, उर्वरक और बिजली जैसे सेक्टरों में आई कमजोरी ने स्टील और प्राकृतिक गैस की बढ़त को पीछे छोड़ दिया। ये सभी सेक्टर औद्योगिक गतिविधियों की नींव माने जाते हैं। 28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद इसका असर दिखना शुरू हुआ।
मार्च का यह आंकड़ा अगस्त 2024 के बाद पहली गिरावट है। उस समय कोर सेक्टर 1.45% घटा था। इसके अलावा यह कोविड के दौर (2020-21) के बाद सबसे कमजोर आंकड़ों में से एक है।
उर्वरक में सबसे ज्यादा गिरावट
सबसे ज्यादा असर उर्वरक सेक्टर पर पड़ा। मार्च में इसका उत्पादन 24.6% गिर गया, जो अब तक का सबसे खराब स्तर है। फरवरी में इसमें 3.4% की बढ़त थी।
इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया संकट है, क्योंकि खाड़ी देश उर्वरक के कच्चे माल के बड़े सप्लायर हैं। सप्लाई में बाधा का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है।
कोयला, तेल और बिजली में भी कमजोरी
कोयला उत्पादन 4% घट गया, जबकि फरवरी में इसमें 2.3% की बढ़त थी। कच्चे तेल का उत्पादन 5.7% गिरा, जो पहले से जारी गिरावट को और बढ़ाता है।
बिजली उत्पादन भी 0.5% घट गया। फरवरी में इसमें 2.3% की बढ़त थी। इससे संकेत मिलता है कि या तो बिजली की मांग कमजोर रही या मौसम के कारण खपत कम हुई।
स्टील और गैस ने कुछ राहत दी
हालांकि कुछ सेक्टरों ने थोड़ी राहत भी दी। स्टील उत्पादन 2.2% बढ़ा, लेकिन फरवरी के 7.6% के मुकाबले यह काफी धीमा है।
प्राकृतिक गैस उत्पादन 6.4% बढ़ा, जो पिछले महीने 5% की गिरावट के बाद सुधार दिखाता है। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए क्षमता 40% से ज्यादा बढ़ाई है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
रिफाइनरी प्रोडक्ट्स में 0.07% की मामूली बढ़त रही। सीमेंट उत्पादन 4% बढ़ा, लेकिन फरवरी के 8.9% के मुकाबले इसमें भी रफ्तार धीमी रही। यह कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में सुस्ती का संकेत देता है।
कोर सेक्टर का इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) में करीब 40% हिस्सा होता है, इसलिए इसे इंडस्ट्रियल ग्रोथ का अहम संकेत माना जाता है।
मार्च में आई यह गिरावट बताती है कि वित्त वर्ष के आखिर में औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई है। आगे की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि मांग कितनी तेजी से सुधरती है और वैश्विक हालात कितने स्थिर रहते हैं।