D-SIB: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आज 2 जनवरी को D-SIB (Domestic Systemically Important Banks) 2022 की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में RBI ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), ICICI बैंक और HDFC बैंक को शामिल किया है। इस लिस्ट में उन बैंकों को शामिल किया जाता है, जो देश की GDP के लिए अहम होते हैं और जिनके डूबने का खतरा नहीं उठाया जा सकता। इस लिस्ट में दो प्राइवेट सेक्टर के बैंक भी शामिल हैं। सरल शब्दों में D-SIB के तहत उन बैंकों को शामिल किया जाता है, जिनके डूबने से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इस कैटेगरी में शामिल बैंकों को अपने रिस्क वेटेड एसेट्स (RWAs) का कुछ हिस्सा अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET-1) के रूप में रखना होता है. सीईटी-1 टियर-1 कैपिटल का वह हिस्सा जिसे बैंक या किसी वित्तीय संस्थान द्वारा इक्विटी के रूप में रखना होता है. RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, SBI को अपनी रिस्क वेटेड एसेट के प्रतिशत के रूप में अतिरिक्त 0.60% सीईटी-1 बनाए रखना होगा। इसी तरह, ICICI बैंक और HDFC बैंक को अतिरिक्त 0.20 प्रतिशत सीईटी-1 के रूप में बनाए रखना होगा।
इस लिस्ट में शामिल होने वाले बैंकों पर RBI कड़ी नज़र रखता है। इसका मकसद वित्तीय तंत्र को ढहने से बचाना है। रिजर्व बैंक साल 2015 से हर अगस्त में इस कैटेगरी में आने वाले बैंक के नाम जारी करता है। केंद्रीय बैंक हर बैंक को सिस्टमैटिक इंपोर्टेंट स्कोर (Systematic Importance Scores, SIC) देता है, जिसके आधार पर ऐसे बैंक को छांटा जाता है। इस कैटेगरी में उन बैंकों को रखा जाता है जो इतने बड़े हैं कि उनके असफल होने का खतरा नहीं उठा सकते हैं यानी कि टू बिग टू फेल (Too Big To Fail). इसका मतलब है कि किसी संकट में आने पर सरकार इन्हें संभालने के लिए मदद भी कर सकती है।
लिस्ट में अब तक सिर्फ 3 बैंक
आरबीआई ने 2015 और 2016 में एसबीआई और ICICI बैंक को डी-एसआईबी के रूप में घोषित किया था। 31 मार्च, 2017 तक बैंकों से एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के साथ-साथ एचडीएफसी बैंक को भी डी-एसआईबी के रूप में चुना गया था। आरबीआई ने कहा कि मौजूदा अपडेट 31 मार्च, 2022 तक बैंकों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है। सितंबर, 2015 में, वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने शुरुआत में केवल दो बैंकिंग संस्थाओं को डी-एसआईबी का दर्जा देने के आरबीआई के फैसले पर कुछ सवाल उठाए थे।