हिंदुस्तान शिपयार्ड को रक्षा मंत्रालय से मिला ₹19,000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट, नौसेना को 5 फ्लीट सर्विस जहाज सप्लाई करेगी कंपनी

रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने भारतीय नौसेना के लिए 5 बेड़ा सहायक पोत यानी फ्लीट सर्विस शिप (FSS) को हासिल करने के लिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (Hindustan Shipyard Limited) के साथ 19,000 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर शुक्रवार 25 अगस्त को हस्ताक्षर किए

अपडेटेड Aug 25, 2023 पर 10:27 PM
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सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी ने 16 अगस्त को इन जहाजों के अधिग्रहण को मंजूरी दी थी

रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने भारतीय नौसेना के लिए 5 बेड़ा सहायक पोत यानी फ्लीट सर्विस शिप (FSS) को हासिल करने के लिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (Hindustan Shipyard Limited) के साथ 19,000 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर शुक्रवार 25 अगस्त को हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि 44,000 टन के कैटेगरी वाले ये जहाज, किसी भारतीय शिपयार्ड कंपनी की ओर से देश में ही बनाए जाने वाले अपनी तरह के पहले जहाज होंगे। इस कदम से डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्रालय ने कहा कि विशाखापत्तनम मुख्यालय वाली हिंदुस्तान शिपयार्ड, स्वदेशी रूप से इन जहाजों की डिजाइनिंग करेगी और बनाएगी। ऐसे में इस डील से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। होगी

मंत्रालय ने कहा, “रक्षा मंत्रालय ने 25 अगस्त को भारतीय नौसेना के लिए करीब 19,000 करोड़ रुपये की कुल लागत से 5 फ्लीट सर्विस शिप (FSS) के लिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए।”


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मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी ने 16 अगस्त को अपनी बैठक में इन जहाजों के अधिग्रहण को मंजूरी दी थी। बयान के मुताबिक, फ्लीट सर्विस शिप को फ्यूल, पानी, गोला-बारूद और भंडार के साथ समुद्र में जहाजों को फिर से भरने के लिए तैनात किया जाएगा। इससे भारतीय नौसेना के बेड़े को बंदरगाह पर लौटने के बिना लंबे समय तक अभियान जारी रखने में सक्षम बनाया जा सकेगा।

बयान में कहा गया है, "ये जहाज बेड़े की रणनीतिक पहुंच और गतिशीलता को बढ़ाएंगे। इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।" मंत्रालय के अनुसार, इन को जहाजों को जरूरत पड़ने पर आपदा कार्यों और लोगों को बचाने के लिए भी तैनात किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा, “यह प्रोजेक्ट अगले 8 सालों में लगभग 168.8 लाख दिनों का रोजगार पैदा करेगी।”

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