भारत में 50,000 नई भर्तियां करेगा डेलॉयट, AI ट्रेनिंग पर होगा फोकस; ग्लोबल छंटनी के बीच बड़ी राहत

Deloitte Hirings: डेलॉयट के लिए भारत एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। कंपनी की कुल वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले भारत में काम करता है। कंपनी भारत में एक क्वांटम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की भी योजना बना रही है, जो भविष्य की तकनीक पर काम करेगा

अपडेटेड Apr 02, 2026 पर 4:10 PM
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डेलॉयट का यह कदम भारतीय जॉब मार्केट के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है

Deloitte: दिग्गज कंसल्टेंसी फर्म डेलॉयट ने अपनी विस्तार योजना के तहत भारत में 50,000 प्रोफेशनल्स को नियुक्त करने का ऐलान किया है। ऐसे समय में जब दुनिया भर की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरियों में कटौती पर विचार कर रही हैं, डेलॉयट का यह कदम भारतीय जॉब मार्केट के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।

छंटनी के बजाय होगी नई भर्ती और स्किलिंग

डेलॉयट साउथ एशिया के सीओओ नितिन किनी ने स्पष्ट किया है कि कंपनी एआई को कर्मचारियों की जगह लेने वाले टूल के रूप में नहीं देखती है। किनी ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि नौकरियां खत्म करना सही रास्ता है। हमारा ध्यान कर्मचारियों को नई तकनीक सिखाने पर है ताकि वे और भी जटिल समस्याओं का समाधान कर सकें।' कंपनी अपने 30,000 कर्मचारियों को पहले से ही एआई की ट्रेनिंग दे दी है। अब बाकी वर्कफोर्स को भी आंतरिक प्लेटफॉर्म्स के जरिए इस बदलाव के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि, कंपनी अपनी कुल कमाई का 9% हिस्सा नई क्षमताओं के विकास, ट्रेनिंग और इनोवेशन पर खर्च कर रही है।


ग्लोबल टैलेंट का सबसे बड़ा हब है भारत

डेलॉयट के लिए भारत एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। कंपनी की कुल वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले भारत में काम करता है। कंपनी भारत में एक क्वांटम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की भी योजना बना रही है, जो भविष्य की तकनीक पर काम करेगा।

एआई अपनाने में भारतीय कंपनियों की चिंताएं

नितिन किनी ने भारतीय उद्यमों के बीच एआई को लेकर चल रही हिचकिचाहट पर भी बात की। उन्होंने बताया कि, कंपनियां इस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं कि उनका संवेदनशील डेटा सुरक्षित रहेगा या नहीं। एआई टूल्स के इस्तेमाल के आधार पर तय होने वाली कीमतें बजट को अनिश्चित बना देती हैं। यही वजह है कि बड़ी कंपनियां इसे बड़े पैमाने पर लागू करने से कतरा रही हैं। इस मामले में किनी का मानना है कि भारत को एआई और साइबर सुरक्षा को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ विकसित करना चाहिए।

दक्षता के साथ सुरक्षा पर हो फोकस

नितिन किनी ने एआई के उपयोग की तुलना कार की परफॉर्मेंस और सेफ्टी से की। उनके अनुसार, जिस तरह तेज कार के लिए बेहतर ब्रेक जरूरी हैं, उसी तरह तेजी से इनोवेशन के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा तंत्र भी जरूरी है। 50,000 नई भर्तियों के साथ डेलॉयट भारत को न केवल एक वर्कफोर्स हब, बल्कि एक तकनीकी लीडर के रूप में स्थापित करने की तैयारी में है।

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