रेवेन्यू सेक्रेटरी तरुण बजाज बजाज (Tarun Bajaj) ने मंगलवार को कहा कि उन्हें नहीं पता है कि भारत अभी एक GST (Goods and Services Tax) और एक रेट के लिए तैयार है या नहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि एक जीएसटी रेट बनाने की जगह, कहीं आसान होगा कि पहले 5 फीसदी, 12 फीसदी और 18 फीसदी के रेट को तोड़कर दो जीएसटी रेट में बदला जाए।
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिया इंडस्ट्री (CII) की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए बजाज ने कहा, "मुझे नहीं पता है कि भारत एक जीएसटी रेट को अपनाने के लिए तैयार है या नहीं... लेकिन, शायद जैसे-जैसे समय बीत रहा है और हम इनवर्टेड ड्यूटी में सुधार कर रहे हैं और छूट वाली वस्तुओं की संख्या को कम कर रहे हैं, मुझे लगता है कि पहले इस 5 फीसदी, 12 फीसदी और 18 फीसदी के ब्याज दर को घटाकर दो रेट में बदला जा सकता है। लेकिन इसे करना भी काफी चुनौतीपूर्ण होगा।"
बजाज की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब जीएसटी व्यवस्था को लागू हुए पांच साल पूरे हो चुके हैं और जीएसटी काउंसिल ने 28-29 जून को चंडीगढ़ में हुए बैठक के दौरान कुछ आइटम्स पर इनवर्टेड ड्यूटी में सुधार किया और कई आइटम्स से जीएसटी छूट को वापस ले लिया।
तरुण बजाज ने कहा कि GST के तहत छूट वाले उत्पादों की सूची को कम करने की जरूरत है। खासतौर से सर्विसेज सेक्टर के लिए ऐसा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि GST दरों को युक्तिसंगत बनाने के काम में मंत्री समूह (GoM) लगा हुआ है लेकिन इसके लिए कुछ समय तक इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा, "अब भी कई उत्पादों एवं सेवाओं को जीएसटी से छूट मिली हुई है जिनमें सेवाओं की संख्या ज्यादा है। इनको कम करने के लिए काम करने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा कि ग्रॉस GST रेवेन्यू में 28 प्रतिशत टैक्स स्लैब का हिस्सा 16 फीसदी है। वहीं सबसे अधिक 65 फीसदी रेवेन्यू 18 फीसदी के टैक्स स्लैब से आता है। वहीं 5 फीसदी और 12 फीसदी टैक्स स्लैब का रेवेन्यू में योगदान क्रमशः 10 फीसदी और आठ फीसदी है।
अस्पतालों में गैर-आईसीयू कमरों के 5,000 रुपये से अधिक किराये पर 5% GST लगाने के फैसले को लेकर उठ रहे सवालों पर बजाज ने कहा कि इतना किराया लेने वाले अस्पतालों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने कहा, "अगर मैं अस्पताल के कमरे का 5,000 रुपये किराया दे सकता हूं तो मैं GST के 250 रुपये भी दे सकता हूं।"