Economic Survey 2023: केंद्र सरकार ने मंगलवार 31 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे या आर्थिक सर्वे 2023 को पेश किया। आर्थिक सर्वे में चेतावनी दी गई है कि ग्लोबल लेवल पर आर्थिक मंदी की आशंका के चलते भारत का एक्सपोर्ट (निर्यात) धीमा हो सकता है। सर्वे में चेतावनी देते हुए कहा गया है, "अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी की अस्थिर कीमतें और कच्चे माल की सप्लाई में रुकावटों के चलते ग्लोबल लेवल पर नई बाधाएं देखने को मिल सकती है, जो हमारी इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर दबाव डाल सकते हैं।" साथ ही इसमें यह चेतावनी दी गई है कि चीन में कोरोना महामारी की वापसी से सप्लाई चेन में रुकावटें देखने को मिल सकता है।
हालांकि ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2023 के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बढ़ा है और इसे लगातार मांग में मजबूती बने रहने से मदद मिली। इसके अलावा सर्वे में यह भी कहा गया है कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ के साथ-साथ इंडस्ट्री को दिए जाने वाले बैंकों के लोन या क्रेडिट की रफ्तार भी बढ़ी है।
बैंकों का क्रेडिट जनवरी 2022 से लगातार धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
ग्लोबल लेवल पर अनिश्चितताओं के वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही के दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कम हुआ है। हालांकि यह अभी भी कोरोना महामारी के पहले के स्तर की तुलना में अधिक है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर इकोनॉमिक सर्वे क्या कहता है?
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आने के बाद कंपनियों की इनपुट लागत पर दबाव कुछ कम हुआ है। इससे उनके मार्जिन में सुधार दिखने को मिल सकता है। सर्वे में कहा गया है, "मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में क्षमताओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है। कई कंपनियां क्षमता विस्तार पर भी काम कर रही है, जो नई निवेश गतिविधियों के लिए शुभ संकेत है।"
सर्वे के मुताबिक, इंडस्ट्री में क्रेडिट ग्रोथ भी काफी बढ़ा है। यह कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े निवेश के लिए शुभ संकेत है। इसमें कहा गया, " परफॉर्मेंस लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) स्कीमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गतिविधां बढ़ाने के लिए तैयार है। इससे एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी, निर्यात पर निर्भरता में कमी और प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित दोनों तरह के लोगों के लिए रोजगार के मौकों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।"