अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लिए जारी बातचीत इस साल पूरी होने की उम्मीद है। 29 जनवरी को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पेश किए गए आर्थिक सर्वे में यह बात कही गई। सर्वे के मुताबिक, भारत के लिए वैश्विक परिस्थितियां, व्यापक आर्थिक दबाव के बजाय बाहरी अनिश्चितताओं में तब्दील हो रही हैं। देश के प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर देशों में धीमी वृद्धि, टैरिफ के कारण ट्रेड में बाधा और कैपिटल के फ्लो में अस्थिरता समय-समय पर निर्यात और निवेशक धारणा पर असर डाल सकती है।
सर्वे के मुताबिक, वैसे अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर चल रही बातचीत इस साल पूरी होने की उम्मीद है। इससे बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता कम हो सकती है। भारत और अमेरिका पिछले साल मार्च से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक 6 राउंड की बातचीत हो चुकी है।
ट्रंप भी दे चुके हैं संकेत
हाल ही में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम समिट के दौरान Moneycontrol की चंद्रा श्रीकांत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सवाल किया था। इस पर ट्रंप ने कहा था, 'सबसे पहले मैं आपके प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) का बहुत सम्मान करता हूं। वह एक महान व्यक्ति हैं और मेरे अच्छे दोस्त हैं। हम भारत के साथ एक अच्छी डील करेंगे।
अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी अनाज और डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए भारतीय बाजार खोले। लेकिन भारत अपने छोटे किसानों की आजीविका की रक्षा करने के लिए इस मांग का विरोध कर रहा है। रूसी तेल की भारी खरीदारी के लिए सजा के तौर पर अमेरिका ने पिछले साल भारतीय सामानों के इंपोर्ट पर और 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद अब अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत है। 2022 में रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत डिस्काउंटेड रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया। हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दावोस में कहा था कि भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25% टैरिफ को कम करने का रास्ता निकल सकता है।