प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार 6 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के पूर्व-चेयरमैन रवि नारायण (Ravi Narain) को गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी एक्सचेंज से जुड़े को-लोकेशन मामले (NSE Co-Location Case) में हुई है। हमारे सहयोगी चैनल CNBC TV-18 ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसी साल 14 जुलाई को NSE की पूर्व चीफ चित्रा रामकृष्ण और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे के साथ रवि नारायण के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
इससे पहले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) ने भी 2009 और 2017 के बीच NSE कर्मचारियों की कथित तौर पर फोन टैप कराने के आरोप में तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बता दें कि NSE को-लोकेशन मामले की जांच सीबीआई भी कर रही है।
नारायण की यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब ईडी ने पिछले हफ्ते दिल्ली की एक अदालत को बताया कि रवि नारायण और अन्य आरोपियों ने NSE और उसके कर्मचारियों को धोखा देने की साजिश रची थी। इन्होंने NSE की साइबर कमजोरियों की स्टडी के नाम पर iSEC सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी के साथ मिलकर NSE के कर्मचारियों की जासूसी कराई और उनकी अवैध फोन टैपिंग कराई। iSEC सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे से जुड़ी कंपनी है।
चित्रा रामकृष्ण भी ED की हिरासत में
रवि नारायण के बाद NSE की अगली चीफ बनी चित्रा रामकृष्ण भी फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं। दिल्ली की एक अदालत ने पिछले हफ्ते ही चित्रा रामकृष्ण की जमानत याचिका खारिज की थी। स्पेशल जज सुनैना शर्मा ने जमानत देने से इनकार किया और कहा कि इस चरण पर जमानत नहीं दी जा सकती। मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया था कि मामले की जांच चल रही है और वह (चित्रा) ‘प्रत्यक्ष’ तरीके से अपराध में लिप्त हैं।