EPFO एंप्लॉयीज की उम्र बढ़ाए जाने के पक्ष में है। उसका कहना है कि रिटायरमेंट एज को लाइफ एक्सपेक्टेंशी के हिसाब से तय करना जरूरी है। इससे पेंशन सिस्टम को मजबूती मिलेगी और रिटायरमेंट के बाद लोगों को पर्याप्त रिटायरमेंट लाभ मिल सकेगा। इकोनॉमिक टाइम्स ने यह खबर दी है।
अभी इंडिया में एंप्लॉयीज की रिटायरमेंट की उम्र 58 से 65 साल के बीच है। प्राइवेट कंपनियों में रिटायरमेंट की उम्र 58 साल है, जबकि सरकार के कुछ विभागों में इसकी सीमा 65 साल तक है। यह अमेरिका और यूरोप के देशों के मुकाबले कम है। यूरोपीय यूनियन में रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है। डेनमार्क, इटली और ग्रीस में यह 67 साल है। अमेरिका में यह 66 साल है।
एक अनुमान के मुताबिक 2047 तक इंडिया बुजुर्गों की ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। तब 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 14 करोड़ तक हो जाएगी। इससे पेंशन फंडों पर दबाव बहुत बढ़ जाएगा।
EPFO ने अपने विजन 2047 डॉक्युमेंट में कहा है, "दूसरे देशों के अनुभव को ध्यान में रख रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के बारे में विचार किया जा सकता है। इससे पेंशन सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।" एक सीनियर अथॉरिटी ने ईटी को बताया, "रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने से लंबी अवधि में ईपीएफओ और दूसरे पेंशन फंडों के पास पेंशन के लिए ज्यादा पैसे जमा होंगे। इससे इनफ्लेशन के असर को कम करने में मदद मिलेगी।"
प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करीब 6 करोड़ लोग EPFO के सब्सक्राइबर्स हैं। यह 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के पेंशन और प्रोविडेंट फंड का प्रबंधन करता है। बताया जाता है कि EPFO अपने प्लान के बारे में PFRDA से भी बातचीत करेगा। PFRDA सरकार की पेंशन स्कीम NPS का रेगुलेटर है।
लेबर इकोनॉमिस्ट केआर श्याम सुंदर ने ईटी को बताया कि ईपीएफओ का प्लान कई तरह से फायदेमंद है। इससे लेबर मार्केट में आज उम्र के मामले में जो फर्क है, उसे दूर करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, "लेकिन, नेट बेसिस पर रिटायरमेंट बढ़ाने से ऐसे इकोनॉमी में बहुत फायदा नहीं मिलेगा जिसमें डिमांड को लेकर कई तरह की बाधाएं हैं। युवाओं को नौकरी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा, जिससे स्किल का सही इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।"