गेमिंग कंपनी एपिक गेम्स 1,000 से ज्यादा नौकरियों में कटौती करने वाली है। आर्थिक अनिश्चितता के कारण वीडियो गेम इंडस्ट्री में विकास रुक गया है। एपिक गेप्स, "Fortnite" गेम वाली कंपनी है। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि ताजा छंटनी से कंपनी के कितने प्रतिशत कर्मचारी प्रभावित होंगे। रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनी के CEO टिम स्वीनी ने कर्मचारियों को भेजे एक नोट में कहा कि उम्मीद है कि कॉन्ट्रैक्टिंग और मार्केटिंग पर खर्च कम करके, और कुछ खाली पदों को खत्म करके कंपनी 50 करोड़ डॉलर बचा लेगी। उन्होंने कहा, "हम जितना कमा रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रहे हैं, और कंपनी को चलाने के लिए हमें बड़े पैमाने पर खर्च में कटौती करनी होगी।"
"Fortnite" जैसे फर्स्ट-पर्सन शूटर गेम जैसे बड़े गेम, महामारी के बाद भी मजबूत बने रहे थे। उस वक्त जब आर्थिक मंदी के कारण बड़े-बड़े गेम्स की मांग कम हो गई थी, तब भी ये गेम अपनी जगह बनाए हुए थे। लेकिन अब इनमें भी लोगों की दिलचस्पी कम हो रही है, खासकर उन 'लाइव-सर्विस गेम्स' में, जो खिलाड़ियों को जोड़े रखने के लिए लगातार नए और महंगे कंटेंट पर निर्भर रहते हैं।
शुरुआत के बाद से अब तक के सबसे मुश्किल दौर में Epic Games
स्वीनी ने कहा कि Fortnite का जादू बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। आज कंपनी 1991 में अपनी शुरुआत के बाद से अब तक के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। स्वीनी ने यह भी कहा कि यह छंटनी AI (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ी नहीं है। वीडियो गेम इंडस्ट्री में यह डर है कि यह टेक्नोलॉजी गेम बनाने वालों (डेवलपर्स) की जगह ले सकती है।
एपिक गेम्स ने इस महीने की शुरुआत में Fortnite की इन-गेम करेंसी की कीमतें बढ़ा दी थीं, और इसकी वजह गेम को चलाने में आने वाले ज्यादा खर्च बताया था। ताजा छंटनी कंपनी द्वारा पिछले 3 सालों में की गई छंटनी का दूसरा बड़ा दौर है। सितंबर 2023 में कंपनी ने मुनाफा बढ़ाने के लिए लगभग 830 नौकरियां कट की थीं, यानि अपने कुल कर्मचारियों में से लगभग 16% कर्मचारियों की छंटनी की थी।
गेमिंग इंडस्ट्री की दूसरी कंपनियों ने भी की छंटनी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में Electronic Arts (EA.O) ने सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी की थी और Titanfall नाम के एक गेम को रद्द कर दिया था, जिस पर काम चल रहा था। पिछले साल के आखिर में Amazon द्वारा बड़े पैमाने पर की गई छंटनी का असर उसके गेमिंग विभाग पर भी पड़ा था। मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों ने इंडस्ट्री की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है, क्योंकि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स से बढ़ती मांग के कारण सप्लाई कम हो रही है। इससे सेमीकंडक्टर की लागत बढ़ गई है और कंसोल बनाने वालों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।