ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट ने अपने सालाना परफॉर्मेंस रिव्यू के तहत करीब 300 कर्मचारियों को सेवा से मुक्त कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कदम कंपनी को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने और लागत नियंत्रण के लिए उठाया गया। बाजार की कड़ी टक्कर और निवेशकों के दबाव में फ्लिपकार्ट ने कमजोर प्रदर्शन वाले स्टाफ को निशाना बनाया।
फ्लिपकार्ट का यह फैसला हालिया वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का नतीजा है। वॉलमार्ट की अधिकांश हिस्सेदारी वाली कंपनी कुल 30,000 से ज्यादा कर्मचारियों में से 2-3% प्रभावित हुए। आंतरिक स्रोतों के अनुसार, प्रभावित लोगों को स्वैच्छिक इस्तीफा या अच्छा सेवरन्स पैकेज का विकल्प दिया गया। ये सिर्फ निचले स्तर तक सीमित नहीं रहा बल्कि मिडिल मैनेजमेंट और टेक टीम्स पर भी इसका असर पड़ा। कर्मचारी सरप्राइज्ड थे, क्योंकि कई टॉप परफॉर्मर्स भी चपेट में आए हैं। कंपनी ने कहा कि यह रीस्ट्रक्चरिंग से पहले की जरूरी सफाई है।
पिछले कुछ महीनों में फ्लिपकार्ट कई मोर्चों पर दबाव में है। ANS Commerce जैसे सब्सिडियरी को बंद कर पूरी टीम निकाल दी गई। अमेजन और मीशो से मुकाबला तेज है, जहां डिस्काउंट वॉर ने मार्जिन्स खराब कर दिए हैं। 2026 के बजट को वॉलमार्ट ने रिजेक्ट कर दिया, IPO की तैयारी में लाभप्रदता दिखाने की जरूरत पड़ी। कर्मचारियों को आउटप्लेसमेंट सपोर्ट और इंटरनल जॉब्स का ऑफर दिया गया, लेकिन कर्मचारियों के बीच असुरक्षा की भावना फैल गई।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में ये ट्रेंड आम हो गया है। फ्लिपकार्ट ने पहले भी 2023 और 2025 में कटौती की, लेकिन इस बार परफॉर्मेंस का बहाना बनाया गया। मीशो, जो फ्लिपकार्ट ग्रुप का हिस्सा है, तेजी से बढ़ रही है, जबकि मुख्य प्लेटफॉर्म संघर्ष कर रहा है। फ्लिपकार्ट ने आधिकारिक बयान में कहा, "हम कुशल ट्रांजिशन सुनिश्चित करेंगे।" लेकिन सवाल ये है क्या ये कटौती स्थायी ग्रोथ लाएगी? इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में और बदलाव हो सकते हैं।
कंपनी भारत में आईपीओ की तैयारी कर रही है, जो 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में आ सकता है। ऐसे में यह छंटनी फ्लिपकार्ट की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, ताकि वह निवेशकों को बेहतर वित्तीय स्थिति दिखा सके।