FOIR कैलकुलेशन: पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर असर और इसे सुधारने के आसान टिप्स

FOIR यह दिखाता है कि आपकी इनकम का कितना हिस्सा फिक्स खर्चों में जा रहा है. कम FOIR से लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ती है, जबकि ज्यादा FOIR से रिजेक्शन या महंगे लोन का जोखिम रहता है.

अपडेटेड Mar 06, 2026 पर 4:25 PM
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जब भी आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन आपकी फाइनेंशियल स्थिति को अच्छे से चेक करती हैं ताकि यह पता चल सके कि आप लोन चुका पाएंगे या नहीं. इस चेकिंग में एक अहम पैरामीटर होता है FOIR यानी फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो. यह तय करता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है और आप उसे समय पर चुका पाएंगे या नहीं.

FOIR क्या है?

FOIR का मतलब है फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो. इसे बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन किसी व्यक्ति की EMI चुकाने की क्षमता जानने के लिए इस्तेमाल करते हैं. यह आपकी इनकम का वो हिस्सा दिखाता है, जो आपकी मौजूदा EMI, किराया और दूसरी फिक्स्ड मंथली पेमेंट्स में चला जाता है.

लोन देने वाली कंपनियां FOIR को देखकर यह तय करती हैं कि किसी व्यक्ति पर पहले से कितनी फाइनेंशियल जिम्मेदारियां (लायबिलिटीज) हैं और क्या उसके पास नया लोन लेने के बाद भी खर्च चलाने लायक इनकम बचेगी या नहीं.


आसान भाषा में कहें तो FOIR से यह पता चलता है:

  • आपकी इनकम का कितना हिस्सा पहले से तय खर्चों में जा रहा है
  • आपको लोन देना कितना जोखिम भरा है
  • आपको ज्यादा से ज्यादा कितना लोन दिया जा सकता है
  • कम FOIR का मतलब है कि आपकी इनकम में से अच्छा खासा हिस्सा बचता है, जिससे आपको लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं, ज्यादा FOIR होने पर आपका लोन रिजेक्ट भी हो सकता है.

FOIR कैसे कैलकुलेट किया जाता है?

FOIR को फीसदी (%) में कैलकुलेट किया जाता है, और इसका फॉर्मूला है:

FOIR = (टोटल फिक्स्ड ऑब्लिगेशन / नेट मंथली इनकम) × 100

जहां,

  • टोटल फिक्स्ड ऑब्लिगेशन में 'मौजूदा लोन की EMI + क्रेडिट कार्ड की EMI (अगर कोई है) + किराया और दूसरे फिक्स्ड खर्चे शामिल होते हैं.
  • नेट मंथली इनकम में 'इनकम टैक्स और PF जैसी कटौतियों के बाद बची हुई सैलरी' शामिल होती है.

उदाहरण:

आइए, किसी बॉरोअर के लिए FOIR कैलकुलेशन को एक उदाहरण के साथ समझते हैं:

  • मंथली सैलरी: 1,00,000 रुपए
  • मौजूदा EMI: 20,000 रुपए
  • किराया: 15,000 रुपए
  • क्रेडिट कार्ड EMI: 5,000 रुपए
  • टोटल ऑब्लिगेशन = 40,000 रुपए

FOIR फॉर्मूला अप्लाई करने पर, 

FOIR: (40,000 / 1,00,000) × 100 = 40%

इसका मतलब है कि आपकी 40% इनकम पहले से तय खर्चों में जा रही है.

अगर आप भी नया पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं, तो मनीकंट्रोल पर 50 लाख रुपए तक का लोन अलग-अलग लेंडर्स के जरिए ले सकते हैं. इन पर ब्याज दर 9.99% सालाना से शुरू होती है और प्रोसेस भी पूरी तरह डिजिटल है, जिससे लोन जल्दी मिल जाता है.

लोन में FOIR का महत्व

  • जोखिम की जांच: बैंक FOIR इसलिए चेक करते हैं ताकि यह जान सकें कि आप और कर्ज संभाल पाएंगे या नहीं. अगर FOIR ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि आप पहले से ही कई EMIs भर रहे हैं, जिससे डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ जाता है. कम FOIR होने पर बैंक आपको एक सुरक्षित बॉरोअर मानते हैं.

  • स्मार्ट बॉरोइंग: FOIR जानने से आप गैर-जरुरी लोन लेने से बच सकते हैं और अपनी फाइनेंशियल स्थिति स्टेबल रख सकते हैं. 

  • लोन अप्रूवल की संभावना : कम FOIR होने पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती हैं. ज्यादा FOIR होने पर लोन रिजेक्ट हो सकता है या कम लोन अमाउंट मिल सकता है.  

  • बेहतर ऑफर्स: कम FOIR होने पर आपको बेहतर ब्याज दर और शर्तें मिल सकती हैं.

FOIR का लोन अप्रूवल पर असर

  • FOIR 40% से कम: बेहतरीन – लोन मिलने की संभावना बहुत ज्यादा
  • FOIR 40-50% के बीच: ठीक-ठाक – लोन मिल सकता है पर अमाउंट थोड़ा कम होगा
  • FOIR 50% से ज्यादा: जोखिम भरा – लोन रिजेक्ट भी हो सकता है या फिर ब्याज दर ज्यादा लग सकती है

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FOIR पर असर डालने वाले फैक्टर

  • इनकम लेवल: ज्यादा इनकम वाले लोगों को थोड़ा ज्यादा FOIR होने पर भी लोन मिल सकता है. कम इनकम वाले लोगों को अपना FOIR सुधारना (कम करना) पड़ता है.

  • मौजूदा लोन: कई लोन चल रहे हैं तो FOIR भी ज्यादा होगा, जिससे नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है.
  • नौकरी: स्टेबल नौकरी वाले सैलरीड कर्मचारियों को तवज्जो दी जाती है. सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए सख्त FOIR शर्तें हो सकती हैं. 

  • लोन का पीरियड: लंबे लोन टेन्योर से EMI कम होती है, जिससे FOIR घटता है. 

  • क्रेडिट स्कोर: अच्छा स्कोर (750+) होने पर थोड़ा ज्यादा FOIR भी चल सकता है. कम क्रेडिट स्कोर और थोड़ा ज्यादा FOIR होने पर लोन रिजेक्ट हो सकता है. 

FOIR कैसे सुधारें?

  • पुराने लोन चुकाएं: छोटे लोन, क्रेडिट कार्ड बिल या EMIs जल्दी चुका देने से FOIR काफी घट जाता है.
  • इनकम बढ़ाएं: सैलरी हाइक, फ्रीलांस या साइड इनकम FOIR फीसदी को कम कर सकती है.
  • लंबे टेन्योर का लोन लें: अगर आप लंबे टेन्योर वाला लोन लेते हैं, तो आपकी EMI कम हो जाती है, जिससे FOIR घटता है. उदाहरण के लिए: 5 साल का लोन, 7 साल के लोन की तुलना में ज्यादा EMI वाला होता है.
  • गैर-जरुरी क्रेडिट कार्ड कर्ज से बचें: क्रेडिट कार्ड की EMI से FOIR बढ़ता है. इसलिए बिल को EMI में बदलने के बजाय पूरी पेमेंट समय पर करने की कोशिश करें.
  • को-बॉरोअर के साथ अप्लाई करें: अगर आप को-बॉरोअर (जैसे जीवनसाथी या माता-पिता) के साथ लोन अप्लाई करते हैं, तो आपकी कुल इनकम बढ़ जाती है, जिससे FOIR में सुधार होता है.

निष्कर्ष

FOIR यह तय करता है कि बैंक आपको नया लोन देगा या नहीं. कम FOIR का मतलब है कि आपको लोन मिलने की संभावना ज्यादा है, वहीं ज्यादा FOIR होने पर रिजेक्शन या ऊंची ब्याज दर की संभावना रहती है. अगर आप भी लोन लेना चाहते हैं, तो मनीकंट्रोल की वेबसाइट या ऐप से 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन डिजिटल तरीके से अप्लाई कर सकते हैं और कुछ ही मिनटों में पैसे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो सकते हैं.

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