जब भी आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन आपकी फाइनेंशियल स्थिति को अच्छे से चेक करती हैं ताकि यह पता चल सके कि आप लोन चुका पाएंगे या नहीं. इस चेकिंग में एक अहम पैरामीटर होता है FOIR यानी फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो. यह तय करता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है और आप उसे समय पर चुका पाएंगे या नहीं.
FOIR का मतलब है फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो. इसे बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन किसी व्यक्ति की EMI चुकाने की क्षमता जानने के लिए इस्तेमाल करते हैं. यह आपकी इनकम का वो हिस्सा दिखाता है, जो आपकी मौजूदा EMI, किराया और दूसरी फिक्स्ड मंथली पेमेंट्स में चला जाता है.
लोन देने वाली कंपनियां FOIR को देखकर यह तय करती हैं कि किसी व्यक्ति पर पहले से कितनी फाइनेंशियल जिम्मेदारियां (लायबिलिटीज) हैं और क्या उसके पास नया लोन लेने के बाद भी खर्च चलाने लायक इनकम बचेगी या नहीं.
आसान भाषा में कहें तो FOIR से यह पता चलता है:
FOIR को फीसदी (%) में कैलकुलेट किया जाता है, और इसका फॉर्मूला है:
FOIR = (टोटल फिक्स्ड ऑब्लिगेशन / नेट मंथली इनकम) × 100
आइए, किसी बॉरोअर के लिए FOIR कैलकुलेशन को एक उदाहरण के साथ समझते हैं:
FOIR फॉर्मूला अप्लाई करने पर,
FOIR: (40,000 / 1,00,000) × 100 = 40%
इसका मतलब है कि आपकी 40% इनकम पहले से तय खर्चों में जा रही है.
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FOIR यह तय करता है कि बैंक आपको नया लोन देगा या नहीं. कम FOIR का मतलब है कि आपको लोन मिलने की संभावना ज्यादा है, वहीं ज्यादा FOIR होने पर रिजेक्शन या ऊंची ब्याज दर की संभावना रहती है. अगर आप भी लोन लेना चाहते हैं, तो मनीकंट्रोल की वेबसाइट या ऐप से 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन डिजिटल तरीके से अप्लाई कर सकते हैं और कुछ ही मिनटों में पैसे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो सकते हैं.