एपल (Apple) का आईफोन (iPhone) असेंबल करने वाली सबसे बड़ी कंपनी फॉक्सकॉन (होन हाई प्रिसिशन इंडस्ट्री) एचसीएल ग्रुप के साथ मिलकर भारत में चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग वेंचर शुरू कर रही है। ताइवान के स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी गई जानकारी के मुताबिक इसकी एक इकाई फॉक्सकॉन होन हाई टेक इंडिया मेगा डेवलपमेंट ज्वाइंट वेंचर में 40 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 3.72 करोड़ डॉलर निवेश करेगी। यह वेंचर वेंदाता के साथ ज्वाइंट वेंचर पिछले साल जुलाई में छोड़ने के महीनों बाद आया है। HCL Group ने हाल ही में कहा था कि वह चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग वेंचर के लिए कर्नाटक की राज्य सरकार से बातचीत कर रहा है।
भारत में एक और अहम निवेश कर रही Foxconn
एचसीएल ग्रुप के साथ मिलकर एक वेंचर बनाने का खुलासा फॉक्सकॉन ने ऐसे समय में किया है जब कुछ समय पहले इसने भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट बनाने के लिए आवेदन किया है। फॉक्सकॉन ने इसे देश में सेमीकंडक्टर्स समेत इलेक्ट्रॉनिक्स मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने वाली स्कीम के तहत फाइल किया है। इसका खुलासा केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने संसद में किया था। अब मंत्रालय इस एप्लीकेशन की जांच कर रही है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक फॉक्सकॉन को देश में तकनीक लाना है और उन्हें यह दिखाना है कि उनके पास सेमीकंडक्टर्स मनाने की तकनीक है। इस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अभी मंत्रालय में चल रही है।
भारत में कारोबार बढ़ाने की योजना
जियोपॉलिटिकल टेंशन और इकनॉमिक अनिश्चितता के चलते चीन में कारोबार को झटका लगा तो फॉक्सकॉन भारत में अपना कारोबार बढ़ाने पर काम कर रही है। इसने वेंदाता ग्रुप के साथ मिलकर एक ज्वाइंट वेंचर के लिए बातचीत किया था। इसके तहत गुजरात में 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर एक चिप प्लांट बनाने की योजना थी। हालांकि इस योजना पर ग्रहण लग गया। अब कंपनी ने सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट के लिए आवेदन किया हुआ है और एक दूसरे सौदे में एचसीएल ग्रुप के साथ साझेदारी भी कर रही है।
अभी के कारोबार की बात करें तो भारत में जितने आईफोन बनते हैं, उसमें से 68 फीसदी फॉक्सकॉन बनाती है। 18 फीसदी पेगाट्रॉन और 14 फीसदी टाटा की विस्ट्रॉन बनाती है। फॉक्सकॉन जितने आईफोन बनाती है, उसमें से 58 फीसदी निर्यात होता है जबकि पेगाट्रॉन के उत्पादन का 80 फीसदी और विस्ट्रॉन के प्रोडक्शन का 96 फीसदी निर्यात होता है। दिसंबर 2023 में इसे एपल प्रोडक्ट्स बनाने के लिए एक प्लांट में 100 करोड़ डॉलर के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी मिली। बंगलुरु एयरपोर्ट के नजदीक स्थित 300 एकड़ के इस प्लांट में यह पहले ही 160 करोड़ डॉलर निवेश कर चुकी है।