World Bank चीफ ने कहा कि विकासशील देशों में कर्ज बढ़ने का कारण ब्याज दरों का ऊंचा होना है

वर्ल्ड बैंक (World Bank) के प्रेसिडेंट डेविड मालपास (David Malpass) ने चेतावनी दी है कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था (Elobal Economy) खतरनाक रूप से मंदी की ओर बढ़ रही है

अपडेटेड Oct 14, 2022 पर 3:10 PM
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World Bank चीफ ने कहा कि विकासशील देशों में कर्ज बढ़ने का कारण ब्याज दरों का ऊंचा होना है

वर्ल्ड बैंक (World Bank) के प्रेसिडेंट डेविड मालपास (David Malpass) ने चेतावनी दी है कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था (Elobal Economy) खतरनाक रूप से मंदी की ओर बढ़ रही है। उन्होंने गरीबों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाने और उनका समर्थन करने की भी अपील की।

मालपास ने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) और वर्ल्ड बैंक (World Bank) की सालाना बैठक के दौरान अलग से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, "हमने 2023 के लिए ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ रेट के अनुमान को तीन प्रतिशत से घटाकर 1.9 प्रतिशत कर दिया है। ग्लोबल इकोनॉमी खतरनाक रूप से मंदी की ओर बढ़ रही है। ग्लोबल मंदी कुछ खास परिस्थितियों के अंतर्गत हो सकती है।"

उन्होंने कहा कि महंगाई की समस्या है, ब्याज दर बढ़ रही है और विकासशील देशों में जो पूंजी जा रही थी, वह बंद हो गई है। इससे गरीबों पर असर पड़ रहा है। मालपास ने कहा, "हम विकासशील देशों में लोगों को आगे बढ़ने में मदद करने पर फोकस कर रहे हैं और अभी इसका उलटा हुआ है। बेशक, सभी देश अलग हैं। लेकिन इन पर फोकस की अधिक जरूरत है क्योंकि यह कोई अलग समस्या नहीं है।"


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उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में कर्ज बढ़ने का कारण ब्याज दरों का ऊंचा होना है। एक तरफ कर्ज बढ़ रहा है और दूसरी तरफ उनकी मुद्राएं कमजोर हो रही हैं। मालपास ने कहा, "करेंसी के मूल्य में गिरावट कर्ज का बोझ बढ़ा रही है। विकासशील देशों के समक्ष कर्ज संकट की समस्या है।’’

उन्होंने कहा कि कुछ देश पहले से ही अपनी ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं और हो सकता है कि वे एक ऐसे बिंदु पर पहुंच रहे हों, जहां उन्हें लगातार बढ़ोतरी की जरूरत नहीं है। कुछ देशों ने एक तरह की सब्सिडी, तो किसी ने दूसरी तरह की सब्सिडी दी है। इसलिए सभी देशों की वित्तीय नितियां अलग-अलग हैं।

साथ ही, यह भी काफी अहम है कि कुछ देश कमोडिटी उत्पादक हैं और कुछ कमोडिटी खरीदार हैं। इसलिए सामान्य तौर पर देश जब संकट को संबोधित करते हैं तो वे लक्ष्यों को ध्यान में रखकर प्रतिक्रिया देने की कोशिश करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने गरीबों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाने का आह्वान किया।

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