गेहूं के बाद अब चावल के एक्सपोर्ट पर अंकुश, सरकार ने विभिन्न ग्रेड के राइस पर लगाई 20% ड्यूटी

सरकार ने स्थानीय मार्केट में चावल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए चावलों के निर्यात पर 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाया है

अपडेटेड Sep 08, 2022 पर 8:52 PM
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भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल एक्सपोर्टर है

भारत सरकार ने विभिन्न ग्रेड के चावलों के निर्यात पर 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने स्थानीय मार्केट में चावल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाया है। बता दें कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल एक्सपोर्टर है। वहीं उत्पादन के मामले में यह चीन के बाद दूसरे नंबर पर है।

पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे चावल उत्पादन वाले प्रमुख राज्यों में औसत से कम बारिश ने चावल की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि भारत सरकार इस साल पहले गेहूं के एक्सपोर्ट पर रोक और शुगर शिपमेंट्स को सीमित करने का फैसला कर चुकी है।

भारत का चावल के ग्लोबल ट्रेड में 40 फीसदी की हिस्सेदारी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश ने वित्त वर्ष 2021-22 में 2.12 करोड़ टन चावल का निर्यात किया, जिसमें से 39.4 लाख टन बासमती चावल था। इसी अवधि में देश ने 6.11 अरब डॉलर मूल्य के गैर-बासमती चावल का भी निर्यात किया।


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देश ने वर्ष 2021-22 में 150 से अधिक देशों को गैर-बासमती चावल का निर्यात किया। कुछ राज्यों में कम बारिश के कारण इस खरीफ बुवाई के मौसम में अब तक धान का रकबा छह प्रतिशत घटकर 367.55 लाख हेक्टेयर रह गया है। ऐसे में चिंता जताई जा रही है कि फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में चावल का उत्पादन घट सकता है।

धान खरीफ सीजन की मुख्य फसल है, जिसकी रोपाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है और अक्टूबर से कटाई शुरू होती है। पिछले फसल वर्ष में चावल का उत्पादन बढ़कर 13 करोड़ 2.9 लाख टन हो गया, जो वर्ष 2020-21 में 12 करोड़ 43.7 लाख टन था।

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