अरबपति बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल का 'एक-चौथाई' सिद्धांत, जिसने उन्हें और उनकी बेटी प्रिया को ब्रिटेन में दिलाई सफलता
अरबपति बिजनेसमैन और वेंदाता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी सफलता के पीछे के उस 'मंत्र' को बताया जिसने उन्हें यूनाइटेड किंगडम (UK) में अपना पैर जमाने और कारोबार खड़ा करने में मदद की
अरबपति बिजनेसमैन और वेंदाता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल
अरबपति बिजनेसमैन और वेंदाता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी सफलता के पीछे लगातार कड़ी मेहनत और '25% के सिद्धांत' को श्रेय दिया। अनिल अग्रवाल ने इस '25% के सिद्धांत' ने उन्हें और उनकी बेटी को इंग्लैंड में अपना पैर जमाने में मदद की। साथ ही वह सिद्धांत की मदद से 3 मिलियन पाउंड का लोन हासिल कर पाए थे, जिसने उन्होंने अपनी पहली बड़ी कंपनी का अधिग्रहण किया था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने बताया, "मैं हमेशा युवाओं से कहता रहता हूं कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। आज मैं आपको उस '25% नियम' के बारे में बताता हूं जिसने मुझे यूनाइटेड किंगडम (UK) में अपना पैर जमाने में मदद की।"
उन्होंने आगे कहा, "शुरुआती कुछ महीने कठिन थे। मैं नए मौकों को लेकर उत्साहित था, लेकिन विदेश में अपना नाम बनाने को लेकर घबराया भी हुआ था। मैनचेस्टर जाने वाली ट्रेन में मैंने सुना कि एक केबल कंपनी 'ड्यूराट्यूब (Duratube)' दिवालिया हो गई है और मैं इसे खरीदने के बारे में सोचने लगा।"
मैंने तुरंत HSBC के एक बैंकर को फोन किया और उनसे कंपनी के बारे में जानकारी ली। मुझे पता चला कि उस समय ड्यूराट्यूब ब्रिटिश टेलीकॉम का इकलौता सप्लायर था और इसका मुख्यालय फेलथम में था।
अनिल अग्रवाल ने आगे कहा, "हमारी बातचीत के बीच में, बैंकर ने मुझसे इंग्लिश में कहा, "I beg your pardon. (क्षमा कीजिए, मुझे ठीक से सुनाई नहीं दिया)।" मैं यह सुनते ही शांत हो गया क्योंकि तब मुझे इसका मतलब नहीं पता था। हालांकि बाद में मैं समझ गया कि वह चाहते हैं कि मैं अपने सवाल को दोहराऊं क्योंकि मोटे भारतीय लहजे के कारण मेरा आवाज अस्पष्ट थी। लेकिन उस समय, हम दोनों अजीब तरह से चुप थे और समान रूप से कंफ्यूज थे!"
वेदांता के चेयरमैन ने बताया, "जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि मेरी बेटी प्रिया भी इस नए देश में ऐसी ही चुनौतियों से गुजर रही होगी। उसके लिए यह चुनौती और भी अधिक रही होगी क्योंकि वह स्कूल में जाती थी। किसी भी नए शख्स की तरह, प्रिया को फिर से अपने दोस्त बनाने पड़ें और एक नई संस्कृति में घुलना-मिलना पड़ा। एक पिता के रूप में मुझे यह देखकर दुख भी हुआ कि मेरी बेटी को मेरे फैसलों के कारण संघर्ष करना पड़ रहा है। लेकिन मुझे विश्वास था कि हमारे थोड़े सपोर्ट से वह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को अपनाने और उसे दूर करने में सक्षम होगी।"
अनिल अग्रवाल ने पोस्ट में आगे लिखा, "मैंने अपनी बेटी से कहा कि बेटा, तुम बहुत मजबूत हो और बस अपनी ताकत पर भरोसा करो। तुम्हें खुद को बदलने की जरूरत नहीं है, बस अपने आप से हर दिन पहले ज्यादा मेहनत करने का वादा करे, भले ही वह एक चौथाई (25%) ही क्यों न हो और फिर एक दुनिया आपकी प्रशंसा करने लगेगी।"
उन्होंने आगे बताया, "इसके बाद से प्रिया अग्रवाल ने जब भी कोई नई एक्टिविटी शुरू की और तो उसमें रोज बेहतर करने की कोशिश करती थी। फिर चाहे वह तैराकी हो, घुड़सवारी हो या फिर समाज सेवा। जल्द ही प्रिया ने यूके में अपना पहला दोस्त बना लिया और फिर जल्द ही उसके कई दोस्त हो गए।"
बेटी ने सीखा अहम सबक
अनिल अग्रवाल ने बताया, "अनजाने में ही मेरी छोटी बेटी ने मुझे एक सबक सिखाया कि हर दिन पहले से अधिक जोर लगाना और कोशिश करते रहना है, भले ही वह 25% ही क्यों न हो। मैंने अपनी अंग्रेजी सुधारने, उनके रंग-ढंग सीखने और उनके कारोबार करने के तरीके सीखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना शुरू कर दिया। जिन दिनों मैं बहुत थक जाता था, मैं उसकी भरपाई अगले दिन कर देता था।"
उन्होंने कहा, "पहले यह दिनचर्या काम जैसी लगती थी, लेकिन फिर यह आदत बन गई। इसके चलते धीरे-धीरे मैं अपने एक विदेशी जमीन पर कारोबारी संबंध बनाने में सफल हुआ और इसने मुझे ड्यूराट्यूब का अधिग्रहण करने के लिए बैंक से 3 मिलियन पाउंड लोन पाने में मदद मिली!"
वेदांता के चेयरमैन ने अंत में सीख देते हुए कहा, "तो बस यह ध्यान में रखें: कड़ी मेहनत को हमेशा अपने दोस्त के रूप में देखना चाहिए न कि अपने 'मास्टर' के रूप में। किसी भी दोस्ती की तरह, इसे आप पर हर दिन थोड़ा बढ़ने दें और जब आप कड़ी मेहनत से एक रिश्ता बना लेते हैं, तो ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे आप हासिल नहीं कर सकते!"