केंद्र सरकार का विनिवेश पर फोकस पहले की तरह ही बना हुआ है। हालांकि इसकी रफ्तार बहुत धीमी है। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि सरकारी स्वामित्व वाली कुछ कंपनियों (PSUs) में रणनीतिक बिक्री की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और वे इस मामले में अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट में विनिवेश का कोई लक्ष्य नहीं रखने का फैसला किया है। हालांकि फाइनेंस मिनिस्ट्री के डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) को उम्मीद है वह इस वित्त वर्ष में 2 कंपनियों की रणनीतिक बिक्री पर आगे बढ़ सकती है। इसमें शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) और एनएमडीसी स्टील लिमिटेड (NSL) शामिल हैं।
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मनीकंट्रोल को बताया, "NMDC स्टील की रणनीतिक बिक्री अंतिम चरण में है। सारा काम हो चुका है, बस वित्तीय बोलियां मंगाने की जरूरत है। यह निजीकरण के लिए एक अच्छा मामला है। सरकार यह कर सकती है, लेकिन पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) से हरी झंडी मिले बिना कुछ नहीं होगा। अनिश्चितता बनी हुई है।"
NMDC स्टील के विनिवेश को राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। एंप्लॉयीज यूनियन इस कदम का विरोध कर रहे हैं। कंपनी में 5,887 लोग काम करते हैं और इसकी एसेट्स 36,929 करोड़ रुपये है।
दिलचस्प बात यह है कि गृह मंत्री अमित शाह ने 19 अक्टूबर 2023 को छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि वहां के नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण नहीं किया जाएगा। यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि यह स्टील प्लांट ही NMDC स्टील का आधार है। इसी को ध्यान में रखते हुए इसे NMDC से अलग कर 'NMDC स्टील लिमिटेड (NSL)' नाम से एक नई कंपनी बनाया गया था। यह सालाना 30 लाख टन की क्षमता वाले फैसिलिटीज को ऑपरेट करती है।
NSL को फरवरी 2023 में बीएसई में सूचीबद्ध किया गया था। अधिकारी ने कहा, "अब शीर्ष स्तर से यह फैसला लिया जाना है कि प्लांट को चालू किया जाएगा या निजीकरण किया जाएगा।"
अधिकारी ने कहा कि शिपिंग कॉरपोरेशन में हिस्सेदारी की बिक्री भी इसी साल पूरी हो जानी चाहिए और इसके लिए वित्तीय बोलियां मंगाई जानी चाहिए। हालांकि यह भी एक राजनीतिक फैसला होगा। इस कंपनी के विनिवेश में मुख्य अड़चन इसकी गैर-एसेट्स इकाई, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स लिमिटेड (SCILAL) की लिस्टिंग थी। हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने इसके मुख्यालय 'शिपिंग हाउस' की बिक्री पर स्टाम्प ड्यूटी माफ करके यह अड़चन भी दूर कर दी।
SCILAL का पूरी तरह से डीमर्जर हो चुका है और इसे बीते 19 मार्च को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट कराया गया था। अधिकारी ने बताया, "मजबूत विपक्ष और गठबंधन सरकार होने के कारण मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में निजीकरण की राह आसान नहीं होगी।"
अधिकारी ने कहा कि प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL) और HLL लाइफकेयर जैसी कुछ छोटी कंपनियां भी रणनीतिक बिक्री के लिए तैयार हैं और इन पर भी कार्य अंतिम चरण में हैं। इन दोनों कंपनियों के लिए वित्तीय बोलियां पहले ही मंगाई जा चुकी है। इस बीच BEML लिमिटेड का राज्यों के साथ जमीन से जुड़े विवाद नहीं सुलझने के चलते हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया अटकी पड़ी है।