संकट के बीच सरकार लाने जा रही ₹2.5 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी स्कीम, विमानन और MSME सेक्टर को मिलेगी संजीवनी

Credit Guarantee Scheme: सरकार का इरादा इस बार केवल छोटे उद्योगों तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि संकट से प्रभावित हर बड़े-छोटे सेक्टर की मदद करना है। जैसे युद्ध के कारण हवाई मार्ग बदलने और ईंधन महंगा होने से एविएशन सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेक्टर को विशेष 'टारगेटेड सपोर्ट' दिया जाएगा

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 9:12 AM
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इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन सभी क्षेत्रों को वित्तीय सहायता और लिक्विडिटी प्रदान करना है, जो युद्ध के कारण सप्लाई चेन में बाधा और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं

Credit Guarantee Scheme: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और ईरान संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार एक बड़ा राहत पैकेज लाने की तैयारी में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में ₹2.5 लाख करोड़ की एक विशेष 'क्रेडिट गारंटी योजना' शुरू की जा सकती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन सभी क्षेत्रों को वित्तीय सहायता और लिक्विडिटी प्रदान करना है, जो युद्ध के कारण सप्लाई चेन में बाधा और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं।

ECGLS का नया और बड़ा अवतार

यह नई योजना 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई 'इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना' (ECGLS) के ढांचे पर आधारित होगी, लेकिन इसका दायरा और बजट बहुत बड़ा होगा:


90% गारंटी: नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) के माध्यम से व्यवसायों द्वारा लिए गए ऋण पर सरकार 90 प्रतिशत की क्रेडिट गारंटी देगी।

बैंकों का जोखिम कम: इसका मतलब है कि यदि कोई कर्जदार लोन चुकाने में चूक करता है, तो बैंक के नुकसान की भरपाई सरकार करेगी। इससे बैंक बिना किसी डर के कंपनियों को लोन दे सकेंगे।

बिना गारंटी के लोन: पिछले ECGLS की तरह, इस बार भी कर्जदारों को लोन लेने के लिए कोई अतिरिक्त सुरक्षा या कोलैटरल देने की आवश्यकता नहीं होगी।

योजना की मुख्य शर्तें और समय सीमा

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना का ड्राफ्ट कैबिनेट के पास भेज दिया गया है और जल्द ही इस पर मुहर लग सकती है:

अवधि: यह योजना चार साल के लिए होने की उम्मीद है।

ब्याज दर की सीमा: कर्ज को किफायती बनाए रखने के लिए बैंकों के लिए ब्याज दर 9.25% और NBFCs के लिए 14% पर सीमित रखी जा सकती है।

मोरेटोरियम सुविधा: कर्जदारों को मूलधन चुकाने के लिए एक साल की छूट मिल सकती है, हालांकि इस दौरान ब्याज देना होगा।

किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

सरकार का इरादा इस बार केवल छोटे उद्योगों तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि संकट से प्रभावित हर बड़े-छोटे सेक्टर की मदद करना है। जैसे युद्ध के कारण हवाई मार्ग बदलने और ईंधन महंगा होने से एविएशन सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेक्टर को विशेष 'टारगेटेड सपोर्ट' दिया जाएगा। MSME उद्योगों को लिक्विडिटी का संकट न हो, इसके लिए योजना का एक बड़ा हिस्सा उनके लिए सुरक्षित रहेगा। कच्चे माल की कमी या इंपोर्ट-एक्सपोर्ट में बाधा झेल रहे अन्य उद्योगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

क्यों पड़ी इस बड़े पैकेज की जरूरत?

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। भारतीय कंपनियां वर्तमान में कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ गई है। युद्ध क्षेत्र के पास से गुजरने वाले शिपिंग और हवाई रूट बंद होने से माल पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे सप्लाई चेन में रुकावट आ गई है। साथ ही बढ़ती लागत के कारण कंपनियों के पास दैनिक कामकाज के लिए नकदी की कमी हो रही है।

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