HDFC-HDFC Bank Merger: देश के कॉरपोरेट इतिहास में अगले साल सबसे बड़ा विलय होने जा रहा है। इसके चलते डेट मार्केट को तगड़ा झटका लग सकता है। यह आशंका एक फिनटेक इंवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म के फाउंडर ने जताई है। एचडीएफसी (हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन-HDFC) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के विलय से 20 हजार करोड़ डॉलर की वित्तीय सेवा कंपनी बनेगी। HDFC और HDFC Bank के विलय के बाद जो बैंक बनेगा, वह अपने कैपिटल बफर को बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की फंडिंग के लिए नोट्स ऑफर कर सकता है।
हालांकि विलय के बाद यह कर्ज की बजाय बैंक के डिपॉजिट्स का ग्रोथ के लिए इस्तेमाल कर सकता है यानी कि इसे बॉन्ड के जरिए पैसे जुटाने की जरूरत नहीं रह जाएगी। इससे बॉन्ड मार्केट में एक बड़ी जगह खाली हो जाएगी। यह स्पेस कितना बड़ा होगा, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि इस साल जितने भी बॉन्ड जारी हुए हैं, ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक उसमें से 7.7 फीसदी तो अकेले तो एचडीएफसी ने जारी किए हैं।
HDFC को बॉन्ड जारी करने की क्यों नहीं रहेगी जरूरत
विलय के बाद एचडीएफसी का एक्सेस एचडीएफसी बैंक के 16.7 लाख करोड़ रुपये के फंड तक हो जाएगा। यह पूरा फंड कम लागत वाला चालू, बचत खाता और टाइम डिपॉजिट्स का होगा। इस प्रकार कम लागत में एचडीएफसी को फंड मिलेगा और यह अपने एसेट्स को कम खर्च में बढ़ा सकेगा। सितंबर 2022 के आखिरी में इसके पास 6.9 लाख करोड़ रुपये का एसेट्स था।
एचडीएफसी के बॉन्ड मार्केट से निकलने का बैंकर्स की आय पर भी निगेटिव असर पड़ेगा जो एचडीएफसी के बॉन्ड्स को प्रोसेस करती हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक इसकी बिक्री में सबसे अधिक शामिल रही हैं। बैंक बॉन्ड की बिक्री में अरेंजमेंट फीस वसूलते हैं।
नए प्लेयर्स आ सकते हैं मार्केट में
एक फिनटेक इंवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म Mavuca Capital Advisors Pvt. के फाउंडर जयेन शाह के मुताबिक एचडीएफसी के बॉन्ड मार्केट से बाहर निकलने से अगले साल बॉन्ड की बिक्री बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। हालांकि जयेन का यह भी कहना है कि इस वैक्यूम को भरने के लिए कुछ सरकारी और निजी कंपनियां पहली बार बॉन्ड जारी कर सकती हैं। एचडीएफसी के बॉन्ड मार्केट से बाहर निकलने पर इसके पियर्स को फायदा मिलेगा क्योंकि अब उन्हें फंड जुटाने में आसानी होगी। इसके चलते टॉप क्लास की हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए फंडिंग कॉस्ट भी कम होगी।