एचडीएफसी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि एचडीएफसी बैंक को उम्मीद है कि एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी के मर्जर में अभी 8-10 महीने का वक्त और लगेगा। यह मर्जर अगले साल सितंबर में संपन्न हो सकता हैं। बता दें कि एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक की जनरल मीटिंग शुक्रवार को हुई। जिसमें अब तक भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में होने वाले 400 अरब डॉलर से ज्यादा के सबसे बड़े मर्जर पर शेयरधारकों की मंजूरी ली गई।
इसी साल 4 अप्रैल को इस मर्जर का ऐलान करते समय दोनों कंपनियों की तरफ से आए आधिकारिक बयान में कहा गया था कि इस मर्जर में 12-18 महीने का समय लगेगा।
कल हुई मीटिंग में एचडीएफसी बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शशिधर जगदीशन (Sashidharan Jagdishan) ने कहा कि पिछले इतिहास और तौर -तरीकों पर नजर डालें तो हम कह सकते है कि अभी इस मर्जर में 8-10 महीने का समय और लगेगा।
उन्होंने आगे कहा कि इस मर्जर के परिणामस्वरुप मर्जर के बाद बनी कंपनी के कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो में 0.20-0.30 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इस बढ़त में HDFC Ltd के हेल्दी कैपिटल एडिक्वेसी का योगदान होगा।
एचडीएफसी की मीटिंग में उसके चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा कि एचडीएफसी बैंक कुछ रेगुलेटरी मुद्दों पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ बातचीत कर रहा है। इन मुद्दों में अनिवार्य कैश रिजर्व रेशियों और वैधानिक तरलता अनुपात (statutory liquidity ratio) से संबंधित पेंच शामिल है।
एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतानु चक्रबर्ती ( Atanu Chakraborty) ने कहा कि " इस मर्जर के संपन्न होने के बाद एचडीएफसी की सभी सब्सिडियरियां मर्जर के बाद बनी कंपनी की सब्सिडियरी बन जाएगी। लेकिन कुछ ऐसी सब्सिडियरी होगी जो बैंक का हिस्सा नहीं बनाई जा सकेगी। ऐसे में उनको भंग कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि एचडीएफसी बैंक इन सब्सिडियरियों के मर्जर के लिए आरबीआई और इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDA की मंजूरी लेगी।
एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने यह बात भी स्पष्ट की अपनी एज को देखते हुए वह एचडीएफसी के बोर्ड में शामिल नहीं होगे। अतानु चक्रबर्ती एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन के रुप में कारोबार करते रहेंगे।