IEX Share Price : इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) के शेयर सोमवार दोपहर के कारोबार में 4% से ज्यादा की गिरावाट के साथ कारोबार कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने मार्केट कपलिंग मामले से जुड़ी कंपनी की याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। इसके चलते आज इस शेयर पर दबाव बना है। फिलहाल 3 बजे के आसपास यह शेयर 5.25 रुपए यानी 3.97 फीसदी की गिरावट के साथ 127 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका इंट्राडे लो 126.01 रुपए है।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्केट कपलिंग मामले से जुड़ी कंपनी की याचिका पर कहा कि यह मामले की सुनवाई के लिए सही स्टेज नहीं है। इस साथ ही शीर्ष अदालत ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) को रेगुलेशन बनाने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि है वह इस मामले के मेरिट पर कोई राय नहीं दे रहा है।
CNBC-आवाज़ के मुताबिक,सुप्रीम कोर्ट ने IEX की दलीलों को मेरिट के आधार पर खारिज नहीं किया है,लेकिन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क फाइनल होने तक सुनवाई टाल दी है।
बता दें कि अभी,बिजली खरीदने और बेचने के ऑर्डर IEX,पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (PXIL)और हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज (HPX) जैसे एक्सचेंजों पर अलग-अलग मैच किए जाते हैं और हर प्लेटफॉर्म अपनी कीमत खुद तय करता है।
प्रस्तावित मार्केट कपलिंग मैकेनिज्म के तहत सभी पावर एक्सचेंज से खरीदने और बेचने के ऑर्डर को एक कॉमन सिस्टम में इकट्ठा किया जाएगा ताकि एक ही मार्केट-क्लियरिंग प्राइस तय किया जा सके। CNBC-आवाज़ की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि CERC ने कहा है कि इस कदम का मकसद ट्रांसपेरेंसी में सुधार करना,कीमतों में अंतर को कम करना और पावर ट्रेडिंग को और बेहतर बनाना है।
2024 में CERC ने मार्केट कपलिंग के लिए एक शैडो पायलट को मंजूरी दी थी और ग्रिड कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया को इसे लागू करने का निर्देश दिया था,जिसमें IEX,PXIL और HPX बारी-बारी से मार्केट कपलिंग ऑपरेटर बनेंगे। जनवरी 2026 से ग्रिड कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया को पावर ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म पर कीमतों को इकट्ठा करना था और एक सिंगल रेफरेंस प्राइस पब्लिश करना था।
IEX ने सुप्रीम कोर्ट में CERC के रेगुलेशन-ड्राफ्टिंग प्रोसेस पर रोक लगाने या इसे पूरी तरह से रोकने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान, IEX के वकील ने मार्केट कपलिंग के खिलाफ कई तीखी दलीलें दीं और इसे नेशनलाइजेशन और सोशलिज्म का एक रूप बताया। कंपनी ने कहा कि उसकी अपनी कमर्शियल सफलता नेशनलाइज़ नहीं की जा सकती और सवाल उठाया कि क्या BSE और NSE जैसे अलग-अलग एक्सचेंज को एक कॉमन फ्रेमवर्क के तहत आसानी से एक साथ जोड़ा जा सकता है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इस स्टेज पर कोर्ट का दखल जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि पावर एक्सचेंज स्पेस एक अनऑर्गनाइज़्ड स्पेस लगता है जिसे रेगुलेशन की ज़रूरत है। कोर्ट ने आगे कहा कि क्योंकि रेगुलेशन अभी फाइनल नहीं हुए हैं, इसलिए CERC द्वारा नोटिफ़ाई किए जाने के बाद IEX को उन्हें चैलेंज करने की पूरी आजादी होगी।