बिजनेस करने वाले लोग अपने एसेट बढ़ाने के लिए कई तरह के बिजनेस में निवेश करते हैं और कैश इनफ्लो के नए तरीके ढूंढ़ते रहते हैं. ऐसे में, कोई जमा-जमाया बिजनेस खरीदना उनकी ग्रोथ के लिए शानदार कदम साबित हो सकता है.
बिजनेस करने वाले लोग अपने एसेट बढ़ाने के लिए कई तरह के बिजनेस में निवेश करते हैं और कैश इनफ्लो के नए तरीके ढूंढ़ते रहते हैं. ऐसे में, कोई जमा-जमाया बिजनेस खरीदना उनकी ग्रोथ के लिए शानदार कदम साबित हो सकता है.
किसी भी मौजूदा बिजनेस के पास पहले से ही अपना कस्टमर बेस होता है. इसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो पहले से मौजूद होता है और सर्विस भी व्यवस्थित होती है. ये सब भविष्य की ग्रोथ के लिए मजबूत नींव का काम करते हैं.
हालांकि, किसी बिजनेस को खरीदने के लिए आपकी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत होनी चाहिए. कई बार लोन लेने की जरूरत इसलिए भी पड़ जाती है ताकि आप कैश फ्लो मैंटेन कर सकें, जोखिम को मैनेज कर सकें, बिजनेस ग्रोथ को और तेजी दे सकें और टैक्स संबंधित फायदे भी उठा सकें.
लोन देने से पहले कोई भी लेंडर आपकी फाइनेंशियल स्थिति को गौर से देखेगा. ऐसे में ये जरूरी है कि आपकी फाइनेंशियल स्थिति दुरुस्त हों. लेंडर्स आपके कैश फ्लो, डेट-टू-इनकम रेशियो और क्रेडिट स्कोर को ध्यान से चेक करते हैं. अगर आपकी फाइनेंशियल प्रोफाइल मजबूत है तो लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ जाती है.
अलग-अलग लोन टाइप की शर्तें अलग होती हैं, इसलिए विकल्पों की तुलना जरूरी है:
जब आप सही लोन टाइप चुन लें, तो एक मजबूत बिजनेस प्लान तैयार करें जिसमें इस बात का जिक्र हो कि ये लोन आपके बिजनेस को कैसे आगे बढ़ाएगा. फिर टैक्स रिटर्न, फाइनेंशियल स्टेटमेंट, बिजनेस वैल्यूएशन जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट के साथ एप्लीकेशन सबमिट करें.
डॉक्यूमेंट सबमिट करने के बाद लेंडर आपकी फाइनेंशियल स्थिति और जिस बिजनेस को आप खरीदना चाहते हैं उसकी मौजूदा स्थिति का आकलन करता है. इसके आधार पर ही यह तय होता है कि आपका लोन अप्रूव होगा या नहीं.
आखिरी स्टेप होता है लोन क्लोजिंग यानी लोन एग्रीमेंट पर साइन करना. इसमें ब्याज दर, लोन अमाउंट, रीपेमेंट शेड्यूल और दूसरी शर्तें तय होती हैं. इस एग्रीमेंट डॉक्यूमेंट को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है.
किसी मौजूदा बिजनेस को खरीदने के लिए लोन मिलना थोड़ा चुनौतीभरा हो सकता है, लेकिन अगर तैयारी सही हो तो ये बिल्कुल आसान है. लेंडर्स का सबसे पहला ध्यान जाता है आपके क्रेडिट स्कोर पर, क्योंकि यहीं से उन्हें यह अंदाजा लगता है कि आप समय पर लोन चुका पाएंगे या नहीं.
इसके अलावा, जिस बिजनेस को आप खरीद रहे हैं, उसकी क्वालिटी भी लोन अप्रूवल में अहम भूमिका निभाती है. अगर बिजनेस पहले से प्रॉफिट कमा रहा है और फाइनेंशियल तौर पर मजबूत है, तो बैंक और बाकी लेंडर आसानी से लोन दे सकते हैं.
अगर बिजनेस हाई-रिस्क इंडस्ट्री में है या घाटे में चल रहा है, तो लेंडर झिझक सकते हैं. कई बार लेंडर पर्सनल गारंटी या कोलैटरल की मांग करते हैं, जो आपके पास न हो तो लोन मिलना मुश्किल हो सकता है.
मनीकंट्रोल ऐप या वेबसाइट पर आप भारत के टॉप लेंडर्स से 50 लाख रुपए तक का इंस्टेंट लोन ले सकते हैं. यह प्रोसेस पूरी तरह डिजिटल है. यहां आपको बस अपनी डिटेल भरनी होती है, KYC वेरिफाई करनी होती है और EMI ऑप्शन चुनना होता है. आपकी नौकरी की स्थिति के अनुसार आपको 10.5% सालाना से शुरू होने वाली ब्याज दर पर लोन मिल सकता है.
किसी मौजूदा बिजनेस को खरीदने के लिए लोन लेना नए स्टार्टअप के लिए फंड जुटाने से ज्यादा आसान होता है. इसकी वजह यह है कि लेंडर को उस बिजनेस की मौजूदा फाइनेंशियल हालत जांचने का ऑप्शन मिल जाता है.
हालांकि, आपका क्रेडिट स्कोर तब भी अहम भूमिका निभाता है. अगर आपका स्कोर कम है, तो लोन मिलना मुश्किल हो सकता है.
क्रेडिट स्कोर जितना ज्यादा होगा, लोन अप्रूवल की संभावना उतनी ही बेहतर होती है. साथ ही सस्ती ब्याज दर और बेहतर रीपेमेंट शर्तें भी मिल सकती हैं.
700+ स्कोर: लोन अप्रूवल के अच्छे चांस
650-699: लोन मिल सकता है लेकिन ब्याज दरें थोड़ी ऊंची हो सकती हैं
650 से कम: आम बैंकों से लोन पाना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वे इसे हाई रिस्क मानते हैं
अगर आप भी किसी मौजूदा बिजनेस को खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो मनीकंट्रोल ऐप के जरिए आप 50 लाख रुपए तक का इंस्टेंट लोन ले सकते हैं. इस पर ब्याज दर 10.5% सालाना से शुरू होती है और अमाउंट आपके अकाउंट में तुरंत ट्रांसफर हो सकता है.
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।