Startups को ₹100 करोड़ से ज्यादा के निवेश पर इनकम टैक्स का नोटिस

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ये नोटिस फाइनेंशियल ईयर 2019 और 2021 के दौरान किए गए अनअकाउंटेड इनवेस्टमेंट्स पर भेजे हैं। स्टार्टअप्स से इन इनवेस्टमेंट्स के नेचर और फंड के सोर्स के बारे में पूछा गया है। 100 करोड़ रुपये और इससे ज्यादा वैल्यू के हर इनवेस्टमेंट की जांच की जा रही है

अपडेटेड May 30, 2023 पर 2:04 PM
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नोटिस में विदेशी निवेशकों की लोकल होल्डिंग्स, तय की गई वैल्यूएशन और इनवेस्टर्स की तरफ से लिए गए लोन के मकसद के बारे में पूछा गया है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) के कई स्टार्टअप्स को नोटिस भेजने की खबर है। इनमें कुछ यूनिकॉर्न्स (Unicorns) भी शामिल हैं। यूनिकॉर्न का मतलब ऐसे स्टार्टअप्स से जिनकी वैल्यूएश 1 अरब डॉलर से ज्यादा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ये नोटिस फाइनेंशियल ईयर 2019 और 2021 के दौरान किए गए अनअकाउंटेड इनवेस्टमेंट्स पर भेजे हैं। स्टार्टअप्स से इन इनवेस्टमेंट्स के नेचर और फंड के सोर्स के बारे में पूछा गया है। 100 करोड़ रुपये और इससे ज्यादा वैल्यू के हर इनवेस्टमेंट की जांच की जा रही है।

सेक्शन 68 के तहत भेजे गए हैं नोटिस

ऐसे कुल इनवेस्टमेंट्स की वैल्यू की जानकारी नहीं मिल पाई है। ये नोटिस इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 68 के तहत भेजे गए हैं। इस सेक्शन का संबंध टैक्सपेयर्स की बुक्स में क्रेडिट होने वाले अनएक्सप्लेंड फंड से है। इसके तहत ऐसे फंड भी आते हैं, जिनके सोर्स की जानकारी उपलब्ध नहीं होती है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने यह खबर दी है। इस सेक्शन का इस्तेमाल आइडेंटिटी, क्रेडिटवर्दिनेस और इश्यू किए शेयरों की वैधता का पता लगाने के लिए किया गया है।


लोन लेने के मकसद के बारे में भी सवाल

इनमें से कुछ नोटिस में विदेशी निवेशकों की लोकल होल्डिंग्स, तय की गई वैल्यूएशन और इनवेस्टर्स की तरफ से लिए गए लोन के मकसद के बारे में पूछा गया है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा है, "फंड्स की बढ़ती राउंड-ट्रिपिंग्स के मामले को देखते हुए इस बारे में सवाल पूछे गए हैं। नॉन-रेजिडेंट इनवेस्टर्स के ममले में एंजेल टैक्स के प्रावधानों के इस्तेमाल की वजह भी पूछी गई है।"

एंजेल टैक्स के लिए निगेटिव लिस्ट

बिजनेस स्टैंडर्ड को जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि रेगुलेटरी फर्म को ध्यान में रख एंजेल टैक्स की निगेटिव लिस्ट तैयार की गई है। 21 ज्यूरिडिक्शंस के सॉवरेन वेल्थ फंड्स, पेंशन फंड्स और सेबी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स एंजेल टैक्स के प्रावधानों के बाहर होंगे, क्योंकि ये रेगुलेटेड एनटिटीज हैं।

प्राइवेट इक्विटी और वेंचर फंडों ने दी है सलाह

बिजनेस स्टैंडर्स ने सूत्र की पहचान बताए बगैर लिखा है कि सरकार को एजेंल के लिए नियम और शर्तों को आसान बनाने के लिए प्राइवेट इक्विटी फंड्स और वेंचर कैपिटल फंडों से सलाह मिली थी। उदाहरण के लिए ड्राफ्ट रूल्स जिससे अभी सिर्फ प्राइस मैचिंग और 10 फीसदी सेफ हार्बर को बाहर रखा गया है, उसके दायरे में बॉन्ड्स को लाने का भी प्रस्ताव है।

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