India-EU Trade Deal: किन सेक्टर में सबसे ज्यादा घटेगी टैरिफ, कौन से सेक्टर रहेंगे डील से बाहर; 10 पॉइंट में समझिए पूरी तस्वीर
India-EU Trdae Deal: भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच करीब दो दशक की बातचीत के बाद मुक्त व्यापार समझौता हो गया। इस ट्रेड डील से कई सेक्टरों में बड़े बदलाव आने वाले हैं। कुछ इंडस्ट्रीज को भारी राहत मिलेगी, तो कुछ को जानबूझकर बाहर रखा गया है। यह समझौता किसके लिए फायदेमंद है और किसके लिए चुनौती- समझिए पूरी तस्वीर।
EU से आने वाली शराब (Alcoholic beverages) पर अब तक बहुत ऊंचा टैक्स लगता था।
India-EU Trdae Deal: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील आखिरकार फाइनल हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की। करीब दो दशक तक रुक-रुक कर चली बातचीत के बाद यह डील भारत और 27 देशों वाले EU ब्लॉक के बीच व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करेगी।
यह समझौता ऐसे वक्त में हुआ है, जब भारत और EU दोनों ही अमेरिका के साथ बदलते व्यापारिक रिश्तों के बीच नए रास्ते तलाश रहे हैं। EU पहले से भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। इस डील के जरिए भारत का अब तक काफी हद तक संरक्षित बाजार ज्यादा खुलने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
EU के 90% से ज्यादा सामानों पर टैरिफ में कटौती
यूरोपियन यूनियन का कहना है कि भारत अब उसके यहां से आने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा सामानों पर या तो टैरिफ पूरी तरह खत्म करेगा या उनमें बड़ी कटौती करेगा। यह किसी एक या दो सेक्टर तक सीमित समझौता नहीं है, बल्कि लगभग सभी प्रोडक्ट कैटेगरी को कवर करता है।
EU के मुताबिक, जब यह टैरिफ कटौती पूरी तरह लागू हो जाएगी, तो यूरोपीय कंपनियों को हर साल करीब 4 अरब यूरो तक की ड्यूटी बचत हो सकती है।
मशीनरी, केमिकल और फार्मा सेक्टर पर खास फोकस
इस ट्रेड डील में भारत के कुछ सबसे ऊंचे टैरिफ वाले सेक्टर भी शामिल किए गए हैं। EU के अनुसार, मशीनरी पर लगने वाला 44 प्रतिशत तक का टैरिफ, केमिकल्स पर 22 प्रतिशत और फार्मास्यूटिकल्स पर 11 प्रतिशत तक का टैरिफ ज्यादातर मामलों में खत्म किया जाएगा।
खासतौर पर केमिकल सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। EU का कहना है कि लगभग सभी केमिकल प्रोडक्ट्स पर टैरिफ हटा दिए जाएंगे। चूंकि केमिकल्स कई इंडस्ट्रीज का बेस इनपुट हैं। इसलिए इसका असर मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर्स तक पहुंचेगा।
यूरोपियन शराब, बियर के भी घटेंगे दाम
EU से आने वाली शराब (Alcoholic beverages) पर अब तक बहुत ऊंचा टैक्स लगता था। इस डील के बाद इस पर टैरिफ घटाकर 40% कर दिया जाएगा। इससे यूरोप की वाइन और दूसरी शराब भारत में पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं। EU की बीयर पर भी टैक्स में कटौती होगी। बीयर पर इंपोर्ट ड्यूटी अब घटकर 50% रह जाएगी।
EU से आने वाले ऑलिव ऑयल पर टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इसी तरह EU के खाद्य तेल (Edible oils) पर भी अब कोई इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। EU के फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर भी टैरिफ हटाने का फैसला किया गया है। इससे यूरोप के पैकेज्ड फूड, जूस और रेडी-टू-ईट प्रोडक्ट्स भारतीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे।
मेडिकल डिवाइसेज पर भी बड़ी राहत
डील में कुछ हाई-वैल्यू सेक्टर्स के लिए खास प्रावधान रखे गए हैं। EU के मुताबिक, ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों पर 90 प्रतिशत प्रोडक्ट्स के लिए टैरिफ पूरी तरह खत्म किया जाएगा। इससे भारत में अस्पतालों और हेल्थकेयर सेक्टर के लिए इंपोर्टेड मेडिकल डिवाइसेज सस्ते हो सकते हैं।
इसके अलावा, एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट से जुड़े लगभग सभी प्रोडक्ट्स पर भी टैरिफ हटाने की बात कही गई है। भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट और एयरोस्पेस प्लान्स के लिहाज से यह काफी अहम माना जा रहा है।
कारों पर टैरिफ 10% तक घटेगा
इस समझौते का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा कारों से जुड़ा है। EU के अनुसार, भारत में इंपोर्ट होने वाली कारों पर टैरिफ को धीरे-धीरे घटाकर 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
हालांकि यह छूट पूरी तरह खुली नहीं होगी। इसके लिए सालाना 2.5 लाख गाड़ियों की सीमा तय की गई है। यानी हर साल सिर्फ पहली 2.5 लाख इंपोर्टेड कारें ही कम टैरिफ का फायदा उठा पाएंगी। साथ ही, इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट को 5 साल तक इस छूट का हिस्सा नहीं रहेगा।
EU सर्विस प्रोवाइडर्स को भारत में खास पहुंच
यह डील सिर्फ सामानों तक सीमित नहीं है। EU का कहना है कि उसे भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज और मैरीटाइम सर्विसेज जैसे अहम सेक्टर्स में विशेष पहुंच मिलेगी।
इसका असर बैंकिंग, इंश्योरेंस, एसेट मैनेजमेंट, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जहां रेगुलेटरी एक्सेस लंबे समय के लिए काफी मायने रखता है।
खाने-पीने की चीजों पर भी टैरिफ में राहत
समझौते के तहत कुछ कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर भी ड्यूटी घटाई जाएगी। इसमें ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और वेजिटेबल ऑयल शामिल हैं।
शराब से जुड़े प्रोडक्ट्स में EU बीयर पर टैरिफ घटाकर 50 प्रतिशत करने की बात कही गई है। इसके अलावा EU वाइन पर पहले ही 20 से 30 प्रतिशत तक की ड्यूटी कटौती हो चुकी है।
ट्रेड के साथ क्लाइमेट सपोर्ट का भी वादा
EU ने भारत के साथ ट्रेड डील करते समय सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी एजेंडे में रखा है। EU का कहना है कि अगले दो साल में भारत को करीब 500 मिलियन यूरो (लगभग ₹5,432 करोड़) की मदद दी जाएगी, ताकि भारत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम कर सके। यानी ऐसी गैसें जो ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु बदलाव की बड़ी वजह हैं।
यह पैसा सीधे कैश देने जैसा नहीं होगा, बल्कि इसे क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, ग्रीन टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री में कार्बन कटौती, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग, क्लाइमेट फ्रेंडली पॉलिसीज जैसे क्षेत्रों में फंडिंग, टेक्निकल सपोर्ट और पार्टनरशिप के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
कौन से सेक्टर भारत-EU ट्रेड डील का हिस्सा नहीं हैं?
भारतEU फ्री ट्रेड डील में कुछ संवेदनशील सेक्टरों को जानबूझकर बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू उद्योग और किसानों पर अचानक दबाव न पड़े। खासतौर पर कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से अलग रखा गया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है और सस्ते यूरोपीय इंपोर्ट से उन्हें नुकसान हो सकता था।
इसके अलावा बीफ, चिकन मीट, चावल और चीनी जैसे संवेदनशील खाद्य उत्पादों पर भी टैरिफ में कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। सरकार का मानना है कि इन सेक्टरों को पूरी तरह खोलने से स्थानीय उत्पादन, कीमतों और रोजगार पर असर पड़ सकता है। इसलिए इस FTA में बाजार खोलने और घरेलू हितों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
भारत को EU का एक्सपोर्ट दोगुना होने की उम्मीद
इस डील के जरिए EU के 96.6% प्रोडक्ट्स पर टैरिफ घटे हैं या फिर खत्म हुए हैं। आगे की तस्वीर पर नजर डालें तो EU का मानना है कि यह समझौता ट्रेड फ्लो में बड़ा बदलाव ला सकता है। EU के अनुमान के मुताबिक, 2032 तक भारत को उसका एक्सपोर्ट दोगुना हो सकता है।
कुल मिलाकर, यह ट्रेड डील भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।