भारत सरकार ने सार्वजनिक और निजी रिफाइनरी कंपनियों से कहा है कि वे रसोई गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाएं। जानकारी के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से भारत की ऊर्जा सप्लाई पर खतरा बढ़ सकता है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार सरकार ने सभी रिफाइनरी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ज्यादा से ज्यादा LPG तैयार करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल दूसरे पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने के बजाय LPG बनाने में किया जाए, ताकि देश में रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला
सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए देश की रिफाइनरी कंपनियों को LPG का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने का निर्देश दिया है। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से कहा गया है कि खरीदी गई LPG सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं को ही बेची जाए। अधिकारियों के अनुसार इस कानून के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह उन जरूरी वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाने के निर्देश दे सके, जिनकी सप्लाई कम पड़ रही हो।
रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकारी आदेश के मुताबिक, भारत में काम कर रही सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियां यह सुनिश्चित करें कि उनके पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन (जो LPG के मुख्य घटक हैं) का अधिकतम इस्तेमाल LPG बनाने में किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि तैयार की गई LPG को केवल तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों—IOCL, HPCL और BPCL—को ही उपलब्ध कराया जाए, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई सही तरीके से मिलती रहे।
5 मार्च 2026 को जारी किए गए सरकारी आदेश में कहा गया है कि सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियां प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल या दूसरे उत्पाद बनाने के लिए नहीं करेंगी। यानी इन गैसों को किसी भी तरह दूसरे प्रोडक्ट बनाने में डायवर्ट या प्रोसेस नहीं किया जाएगा, बल्कि इन्हें LPG बनाने के लिए ही इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई कंपनी इस आदेश का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स (प्रोडक्शन, स्टोरेज और सप्लाई का मेंटेनेंस) ऑर्डर, 1999 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा लागू अन्य कानूनों के तहत भी कदम उठाए जा सकते हैं। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है और यह तब तक लागू रहेगा, जब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई नया आदेश जारी नहीं किया जाता।
सरकारी सूत्रों के अनुसार कच्चे तेल, रिफाइंड प्रोडक्ट और LPG की उपलब्धता के मामले में भारत फिलहाल अच्छी स्थिति में है। एक अधिकारी ने कहा कि देश के पास इन सभी चीजों की सप्लाई को लेकर फिलहाल कोई बड़ी चिंता नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास काफी बड़ी रिफाइनिंग क्षमता है। अगर जरूरत पड़ी तो देश अपनी प्राथमिकताएं बदलकर रिफाइनरियों में उत्पादन को अलग-अलग उत्पादों की ओर मोड़ सकता है। हालांकि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से भारत की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर खासकर LPG की सप्लाई पर पड़ सकता है। भारत अपनी करीब 80-85% LPG जरूरतें आयात करता है, जिनमें से ज्यादातर गैस खाड़ी देशों से आती है। यह LPG सप्लाई लगभग पूरी तरह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत तक पहुंचती है। ऐसे में अगर उस इलाके में हालात खराब होते हैं, तो गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।