भारत के पास 60 दिनों का क्रूड ऑयल बैकअप; 8 लाख टन LPG भी मंगाया: सरकार

ऑयल मिनिस्ट्री ने गुरुवार 26 मार्च को कहा कि भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कोई रुकावट आती है तब भी भारत को तेल की कमी नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत ने पश्चिमी देशों से तेल की खरीद बढ़ा दी है, जिससे किसी भी रुकावट की भरपाई हो हो जाएगी

अपडेटेड Mar 26, 2026 पर 6:34 PM
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अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से करीब 8 लाख मीट्रिक टन LPG (रसोई गैस) भारत आने के रास्ते में है

ऑयल मिनिस्ट्री ने गुरुवार 26 मार्च को कहा कि भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कोई रुकावट आती है तब भी भारत को तेल की कमी नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत ने पश्चिमी देशों से तेल की खरीद बढ़ा दी है, जिससे किसी भी रुकावट की भरपाई हो हो जाएगी।

मंत्रालय ने कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के हालात के बावजूद, भारत को आज दुनिया भर में अपने 41 से अधिक सप्लायर्स से पहले के मुकाबले ज़्यादा कच्चा तेल मिल रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में ज्यादा मात्रा में उपलब्ध तेल, खासकर पश्चिमी देशों के पास उपलब्ध तेल ने किसी भी रुकावट की भरपाई कर दी है।”

सरकार ने यह भी बताया कि हर रिफाइनरी 100% से ज्यादा इस्तेमाल पर चल रही है और अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई भारतीय तेल कंपनियों ने पहले ही सुनिश्चित कर ली है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि, "सप्लाई में कोई कमी नहीं है।"


मंत्रालय ने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि भारत के पास केवल 6 दिन का तेल स्टॉक बचा है। मंत्रालय ने कहा कि देश के पास कुल मिलाकर 74 दिनों तक तेल रखने की क्षमता है। अभी भारत के पास करीब 60 दिनों का तेल स्टॉक मौजूद है। इसमें कच्चा तेल, तैयार पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद और जमीन के नीचे बने खास भंडारण (स्ट्रैटेजिक स्टोरेज) में रखा तेल भी शामिल है। यह स्टॉक पश्चिम एशिया संकट के 27 दिन बाद भी बना हुआ है।

मंत्रालय ने कहा कि दुनिया में कुछ भी हो जाए, हर भारतीय के लिए करीब दो महीने तक तेल की लगातार सप्लाई उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले से तय कर ली गई है।

मंत्रालय के अनुसार, भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है और ऐसे हालात में जमीन के नीचे बने रणनीतिक भंडार (कवर्न स्टोरेज) की अहमियत कम हो जाती है, क्योंकि सप्लाई पहले से ही पर्याप्त है।

LPG सप्लाई भी मजबूत

सरकार ने यह भी बताया कि एलपीजी की सप्लाई को लेकर भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से करीब 8 लाख मीट्रिक टन एलपीजी (रसोई गैस) भारत आने के रास्ते में है और इसकी सप्लाई तय है।

मंत्रालय ने बताया कि एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर के बाद देश की रिफाइनरियों में उत्पादन 40% बढ़ा दिया गया है। अब रोजाना करीब 50,000 मीट्रिक टन एलपीजी बन रही है। यह देश की कुल जरूरत (करीब 80,000 मीट्रिक टन रोजाना) का 60% से ज्यादा हिस्सा पूरा कर रही है।

सरकार ने कहा कि अब देश की रोजाना एलपीजी आयात (इंपोर्ट) की जरूरत घटकर सिर्फ 30,000 मीट्रिक टन रह गई है। यानी भारत अब पहले के मुकाबले ज्यादा उत्पादन खुद कर रहा है और बाहर से कम मंगाना पड़ रहा है।

घरेलू उत्पादन के अलावा, 8 लाख मीट्रिक टन एलपीजी पहले से तय है और अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से भारत आ रही है। यह गैस देश के 22 एलपीजी इंपोर्ट टर्मिनल्स पर पहुंचेगी, जबकि 2014 में ऐसे सिर्फ 11 टर्मिनल्स थे।

सरकार ने बताया कि देश के लिए लगभग एक पूरे महीने का एलपीजी स्टॉक पहले से पक्का कर लिया गया है, और नई खरीद लगातार फाइनल की जा रही है।

मंत्रालय ने कहा कि तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख सिलेंडर सफलतापूर्वक वितरित कर रही हैं। उपभोक्ताओं की घबराहट (पैनिक ऑर्डरिंग) के कारण सिलेंडर की मांग 89 लाख तक बढ़ गई थी, जो अब फिर से 50 लाख सिलेंडर रोजाना पर लौट आई है। सिलेंडर की होर्डिंग या ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमर्शियल सिलेंडर आवंटन को राज्यों के साथ मिलकर 50% बढ़ा दिया गया है।

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