कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बुधवार को कहा कि भारत की गेहूं के निर्यात से बैन (Wheat Export Ban) हटाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। गोयल ने कहा कि भारत कभी भी गेहूं के निर्यात के मामले में बड़े देशों में नहीं शामिल था और उनका मानना है कि अगर भारत इससे बैन हटाता है तो इससे कालाबाजारी करने वालों, जमाखोरों और सट्टेबाजों को ही मदद मिलेगी।
गोयल ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के साथ एक बातचीत में कहा कि भारत की गेहूं के निर्यात से तत्काल बैन हटाने की योजना नहीं है, लेकिन हम जरूरतमंदों देशों के साथ सरकार के स्तर पर संपर्क में है और उन्हें मदद देना जारी रखेंगे।
यह पूछे जाने पर भारत कब गेहूं के प्राइवेट एक्सपोर्ट की इजाजत देगा, गोयल ने कहा कि फिलहाल दुनिया भर में अस्थिरता है और अगर हम इस दौरान निर्यात से बैन हटाते हैं तो यह कालाबाजारी करने वालों, जमाखोरों और सट्टेबाजों को ही मदद मिलेगी। न कि वास्तव में कमजोर और जरूरतमंद देशों को इससे कोई मदद होगी।
भारत ने जब गेहूं के निर्यात पर बैन लगाने का ऐलान किया था, तब कई देशों ने इसकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा, "गेहूं निर्यात को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आलोचना सहीं नहीं। गेहूं के ग्लोबल एक्सपोर्ट में कभी भी भारत बड़े देश के तौर पर शामिल नहीं रहा है और जरूरतमंद देशों को हम अब भी एक्सपोर्ट कर रहे हैं।"
गोयल ने यह भी बताया कि इस साल गेहूं के उत्पादन में 7 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन लू के कारण फसल की कटाई जल्दी हुई और इसके उत्पादन में कमी आई है। उन्होंने कहा, "इस स्थिति को देखते हुए हम जितना उत्पादन कर रहे हैं, वह घरेलू खपत के लिए पर्याप्त है।"
गोयल ने कहा कि भारत गेहूं के अंतरराष्ट्रीय बाजार में कभी भी पारंपरिक सप्लायर नहीं था और करीब 2 साल पहले ही गेहूं का निर्यात शुरू किया था। उन्होंने बताया कि पिछले साल 7 लाख मीट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया गया था और इसमें अधिकांश पिछले दो महीनों के भीतर किया गया, जब रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ था।
गोयल ने आगे कहा, "भारत का गेहूं निर्यात इसके विश्व व्यापार के 1 फीसदी से कम है और हमारे निर्यात पर रोक से वैश्विक बाजारों को प्रभावित नहीं होना चाहिए। हमने गरीब देशों और पड़ोसियों को निर्यात की अनुमति देना जारी रखा है।"