चीन का टूटेगा दबदबा? कनाडा और फ्रांस समेत 4 देशों से भारत कर रहा क्रिटिकल मिनरल्स डील की बात

भारत सरकार चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए कनाडा, फ्रांस, ब्राजील और नीदरलैंड्स के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण बातचीत कर रही है। इन प्रस्तावित सौदों में संयुक्त रूप से मिनरल्स की खोज, खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग शामिल हो सकती है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है

अपडेटेड Feb 10, 2026 पर 5:18 PM
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भारत अभी कई अहम क्रिटिकल मिनरल्स के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है

भारत सरकार चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए कनाडा, फ्रांस, ब्राजील और नीदरलैंड्स के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण बातचीत कर रही है। इन प्रस्तावित सौदों में संयुक्त रूप से मिनरल्स की खोज, खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग शामिल हो सकती है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। भारत सरकार इन समझौते के जरिए क्रिटिकल मिनिरल्स की सप्लाई पक्की करने के लिए अपनी ग्लोबल कोशिशों को बढ़ी रही है।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इन चर्चाओं का फोकस मुख्य रूप से लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर है। इसके अलावा भारत मिनरल प्रोसेसिंग से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों तक पहुंच भी चाहता है। बातचीत से जुड़े लोगों ने पहचान गोपनीय रहने की वजह से नाम उजागर नहीं किए हैं।

माइनिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत अभी कई अहम क्रिटिकल मिनरल्स के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है। चीन न सिर्फ इन मिनरल्स की ग्लोबल सप्लाई में मजबूत पकड़ रखता है, बल्कि उसके पास माइनिंग और प्रोसेसिंग की आधुनिक क्षमताएं भी हैं। ऐसे में उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य के तहत एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन को तेज कर रहे भारत के लिए सप्लाई सोर्स को विविध बनाना बेहद जरूरी हो गया है।


हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी आगाह करते हैं कि मिनरल्स की खोज से लेकर उसके कमर्शियल उत्पादन तक पहुंचने में लंबा समय लग सकता है। किसी क्षेत्र में खोज की प्रक्रिया ही पांच से सात साल तक चल सकती है और कई मामलों में इसमें कमर्शियल उत्पादन शुरू ही नहीं हो पाता।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत जनवरी में जर्मनी के साथ किए गए क्रिटिकल मिनरल्स समझौते के कुछ हिस्सों को इन नए करारों में भी दोहराना चाहता है। जर्मनी के साथ हुए समझौते में खोज, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग के साथ-साथ दोनों देशों और तीसरे देशों में मिनरल्स एसेट्स के अधिग्रहण और विकास को शामिल किया गया था।

मनीकंट्रोल इस रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च की शुरुआत में भारत आने की संभावना है। इस दौरान यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि ब्राजील, फ्रांस और नीदरलैंड्स की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।

भारत पहले से ही ग्लोबल स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की तलाश में सक्रिय है। उसने अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ इस दिशा में समझौते किए हैं और पेरू व चिली के साथ भी व्यापक द्विपक्षीय करारों पर बातचीत चल रही है, जिनमें क्रिटिकल मिनरल्स शामिल हैं।

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