India-New Zealand FTA: सेब, कपड़े से वाइन तक... किसे कितना होगा फायदा? जानिए पूरी डिटेल

India-New Zealand FTA: भारत-न्यूजीलैंड FTA से भारतीय निर्यात को बड़ा फायदा मिलेगा, खासकर टेक्सटाइल, एग्री और MSME सेक्टर को। वहीं न्यूजीलैंड को सीमित छूट दी गई है, ताकि घरेलू उद्योग और किसानों की सुरक्षा बनी रहे। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Apr 27, 2026 पर 7:14 PM
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भारत ने भी कुछ सेक्टर में टैरिफ कम किए हैं, लेकिन पूरी तरह खुलापन नहीं दिया है।

India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन हुआ है। इस समझौते के तहत भारतीय सामान को न्यूजीलैंड में पूरी तरह ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। वहीं भारत ने अपने टैरिफ में छूट सोच-समझकर दी है, ताकि घरेलू सेक्टर पर ज्यादा दबाव न आए।

भारत को क्या फायदा होगा

न्यूजीलैंड ने 8,000 से ज्यादा टैरिफ लाइनों पर शुल्क खत्म कर दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा भारत के उन सेक्टर को मिलेगा, जहां ज्यादा रोजगार होता है।


टेक्सटाइल, कपड़ा, लेदर, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे सेक्टर अब ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे। इससे MSME और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।

इसके अलावा इंजीनियरिंग गुड्स, प्लास्टिक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी टैरिफ हटने का फायदा मिलेगा।

कृषि सेक्टर के लिए नए मौके

इस समझौते से कृषि सेक्टर को भी फायदा होगा। शहद, मसाले, अनाज, फल, कॉफी और कोको जैसे उत्पादों को अब न्यूजीलैंड का बेहतर बाजार मिलेगा। इससे किसानों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए नए मौके खुल सकते हैं।

खासतौर पर शहद का शामिल होना अहम है, क्योंकि इससे वैल्यू-एडेड एग्री प्रोडक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा।

न्यूजीलैंड को क्या मिला

भारत ने भी कुछ सेक्टर में टैरिफ कम किए हैं, लेकिन पूरी तरह खुलापन नहीं दिया है। करीब 70% टैरिफ लाइनों पर छूट दी गई है, जो कुल व्यापार का 95% हिस्सा कवर करती है। वहीं करीब 30% सेक्टर को पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि देश के संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित रहें।

एग्री प्रोडक्ट्स पर कंट्रोल्ड एंट्री

न्यूजीलैंड के कुछ कृषि उत्पाद जैसे सेब, कीवी और मनुका हनी भारत में आ सकेंगे, लेकिन सीमित मात्रा में।

इन्हें TRQ (टैरिफ रेट कोटा) के तहत लाया जाएगा। यानी एक तय सीमा तक कम शुल्क, और उससे ज्यादा आयात पर ज्यादा शुल्क लगेगा। इससे भारतीय किसानों को नुकसान से बचाने की कोशिश की गई है।

वाइन पर अलग नियम

वाइन के लिए अलग नियम बनाए गए हैं:

  • $5 से कम कीमत वाली वाइन पर कोई राहत नहीं, 150% ड्यूटी जारी
  • $5 से $15 के बीच वाली वाइन पर धीरे-धीरे ड्यूटी कम होगी
  • $15 से ज्यादा कीमत वाली वाइन पर ज्यादा छूट मिलेगी

किन सेक्टर को पूरी तरह बचाया गया

भारत ने डेयरी, खाद्य तेल, चीनी और कुछ अहम कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है। इसका मकसद किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना है।

सर्विस और छात्रों के लिए बड़ा फायदा

यह समझौता सिर्फ सामान तक सीमित नहीं है। भारतीय छात्रों को भी इससे काफी फायदा होगा, जो न्यूजीलैंड पढ़ने और काम करने के लिए जाना चाहते हैं।

  • भारतीय छात्रों के लिए वीजा और काम के नियम आसान होंगे।
  • पढ़ाई के दौरान हफ्ते में कम से कम 20 घंटे काम की इजाजत।
  • पढ़ाई के बाद 3 से 4 साल तक काम करने का मौका।
  • हर साल 1,000 भारतीय युवाओं को वर्किंग हॉलिडे वीजा मिलेगा।

फार्मा और मेडिकल सेक्टर को राहत

फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर के लिए नियम आसान किए गए हैं। अब US FDA, EMA जैसे रेगुलेटर्स की रिपोर्ट को मान्यता मिलेगी, जिससे मंजूरी जल्दी मिलेगी और लागत कम होगी।

निवेश और डिजिटल पेमेंट पर फोकस

न्यूजीलैंड ने 15 साल में 20 बिलियन डॉलर निवेश का प्रस्ताव दिया है। दोनों देश फास्ट पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर भी काम करेंगे। इससे सस्ते और तेज ट्रांजैक्शन मुमकिन होंगे।

कुल मिलाकर यह समझौता भारत के लिए निर्यात बढ़ाने, रोजगार बनाने और सर्विस सेक्टर को मजबूत करने का बड़ा मौका है। साथ ही भारत ने अपने संवेदनशील सेक्टर को बचाते हुए संतुलन भी बनाए रखा है। इससे यह डील भारत के लिए संतुलित और रणनीतिक समझौता बनती है।

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