दिग्गज रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 7.3 प्रतिशत रह सकती है। एजेंसी के मुताबिक, मजबूत आर्थिक बढ़त से लोगों की औसत आय बढ़ेगी और इससे बीमा सुरक्षा की मांग को सीधा फायदा मिलेगा।
दिग्गज रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 7.3 प्रतिशत रह सकती है। एजेंसी के मुताबिक, मजबूत आर्थिक बढ़त से लोगों की औसत आय बढ़ेगी और इससे बीमा सुरक्षा की मांग को सीधा फायदा मिलेगा।
मजबूत अर्थव्यवस्था से बीमा सेक्टर को फायदा
भारत के बीमा सेक्टर पर जारी रिपोर्ट में Moody’s Ratings ने कहा कि तेज आर्थिक विस्तार, बढ़ती डिजिटाइजेशन, टैक्स से जुड़े बदलाव और सरकारी बीमा कंपनियों में प्रस्तावित सुधारों के चलते बीमा उद्योग में प्रीमियम ग्रोथ बनी रहेगी। इससे सेक्टर की अभी कमजोर मुनाफे में भी सुधार आने की उम्मीद है।
FY 2025 में ग्रोथ 6.5 से बढ़कर 7.3 प्रतिशत
Moody’s के मुताबिक, मार्च 2026 तक यानी FY 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो पिछले साल 6.5 प्रतिशत थी। एजेंसी का कहना है कि इससे लोगों की औसत आमदनी बढ़ेगी और बीमा की मांग को मजबूती मिलेगी।
प्रति व्यक्ति आय में 8.2 प्रतिशत की बढ़त
FY 2024-25 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 11,176 डॉलर पहुंच गई। इसी दौरान देश की कुल GDP ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रही।
प्रीमियम रेवेन्यू में 17 प्रतिशत की छलांग
Moody’s ने बताया कि मजबूत आर्थिक ग्रोथ की वजह से FY 2025-26 के पहले आठ महीनों यानी अप्रैल से नवंबर के बीच कुल बीमा प्रीमियम रेवेन्यू 17 प्रतिशत बढ़कर 10.9 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 14 प्रतिशत बढ़े। लाइफ इंश्योरेंस के नए बिजनेस प्रीमियम में 20 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
यह ग्रोथ 2024-25 के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज रही। उस साल कुल बीमा प्रीमियम रेवेन्यू में सिर्फ 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी और यह 11.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा था।
बढ़ती जोखिम जागरूकता का असर
Moody’s का कहना है कि प्रीमियम रेवेन्यू में आई यह तेजी सिर्फ आर्थिक ग्रोथ की वजह से नहीं है। भारतीय उपभोक्ताओं में जोखिम को लेकर बढ़ती जागरूकता और देश की अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ती डिजिटाइजेशन भी इसकी बड़ी वजह है।
डिजिटाइजेशन की वजह से बीमा उत्पादों की बिक्री और वितरण आसान हुआ है। इससे बीमा सेवाएं ज्यादा लोगों तक पहुंच पा रही हैं। यह भारतीय बीमा रेगुलेटर के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य के अनुरूप है।
सरकारी कंपनियों का मुनाफा सुधारने पर फोकस
Moody’s ने कहा कि सरकार का ध्यान सरकारी बीमा कंपनियों का मुनाफा सुधारने पर है, क्योंकि इन कंपनियों का बीमा बाजार पर बड़ा असर है। सरकार पहले ही Life Insurance Corporation of India (LIC) में अपनी अल्पांश हिस्सेदारी बेच चुकी है।
री-कैपिटलाइजेशन, निजीकरण पर भी विचार
सरकार कुछ सरकारी बीमा कंपनियों को दोबारा पूंजी देने की योजना पर भी काम कर रही है, बशर्ते वे अपनी अंडरराइटिंग परफॉर्मेंस बेहतर करें। इसके अलावा, सरकारी बीमा कंपनियों के विलय या निजीकरण जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
Moody’s ने यह भी कहा कि भारतीय बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किए जाने से उन्हें ज्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। इससे सेक्टर को आगे और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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