India's Services PMI: सुस्त पड़ा सर्विस सेक्टर! 14 महीने के निचले स्तर पर पीएमआई, क्या है मतलब?

India's Services PMI: देश की जीडीपी में सबसे अधिक योगदान करने वाले सर्विसेज सेक्टर की रफ्तार पिछले महीने मार्च में सुस्त पड़ी। इसकी रफ्तार न सिर्फ सुस्त पड़ी बल्कि 14 महीने के निचले स्तर पर आ गई। चेक करें लेटेस्ट आंकड़े और जानिए कि मार्च महीने में इसकी रफ्तार सुस्त क्यों पड़ी

अपडेटेड Apr 06, 2026 पर 12:58 PM
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PMI के 50 के नीचे जाने का मतलब होता है कि एक्टिविटीजज सिकुड़ रही हैं तो 50 के ऊपर होने का मतलब है कि एक्टिविटीज में विस्तार हो रहा है।

India's Services PMI: पिछले वित्त वर्ष 2026 के आखिरी महीने मार्च में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सुस्त पड़ी और यह फिसलकर यह 14 महीने के निचले स्तर पर आ गया। मांग में सुस्ती और महंगाई की तेज रफ्तार के दबाव में सर्विसेज सेक्टर ग्रोथ का पीएमआई (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) मार्च में 57.5 पर आ गया जोकि फरवरी महीने में 58.1 पर था। सर्विसेज एक्टिविटी और मैन्युफैक्चरिंग, दोनों को मिलाकर बात करें तो कंपोजिट पीएमआई फरवरी महीने में 58.9 से गिरकर पिछले वित्त वर्ष 2026 के आखिरी महीने मार्च में 57 पर पर आ गया। इसके आंकड़े आज सोमवार 6 अप्रैल को सामने आए।

सुस्ती के बावजूद लगातार बढ़ रही एक्टिविटी

सर्विसेज सेक्टर की पीएमआई मार्च महीने में गिरकर 14 महीने के निचले स्तर पर आ गई तो मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर की पीएमआई भी नीचे आई। हालांकि इस सुस्ती के बावजूद ये दोनों रीडिंग्स अभी भी 50 से ऊपर बने हुए हैं यानी कि सुस्त चाल से ही सही, इन सेक्टर्स में गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इस रीडिंग के 50 के नीचे जाने का मतलब होता है कि एक्टिविटीजज सिकुड़ रही हैं तो 50 के ऊपर होने का मतलब है कि एक्टिविटीज में विस्तार हो रहा है।


तीन साल में सबसे सुस्त रफ्तार से बढ़ी एक्टिविटी

सर्वे के आंकड़ों के सामने आया है कि नए बिजनेस की ग्रोथ एक वर्ष से अधिक समय में सबसे धीमी रही। कंपनियों के मुताबिक इसकी वजह कॉम्पटीशन का दबाव, घरेलू मांग में कमी और पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई के चलते टूरिज्म जैसे सेक्टर्स पर पड़ने वाले असर हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई के चलते एनर्जी और कच्चे माल की कीमतें बढ़ीं तों लागत में करीब 45 महीने में सबसे तेज उछाल दिखी। कंपनियों ने आउटपुट प्राइस बढ़ाया तो लेकिन यह लागत में बढ़ोतरी की तुलना में कम रही है जिससे मार्जिन पर दबाव पड़ा। मार्च महीने में निर्यात मांग मजबूत बनी रही, विदेशी ऑर्डर रिकॉर्ड लेवल के करीब पहुंच गए तो बेहतर कारोबारी भरोसे और भविष्य में मजबूत मांग की उम्मीदों के बीच रोजगार में लगातार वृद्धि हुई। हालांकि ओवरऑल बात करें तो एक्टिविटीज सुस्त पड़ी और तीन साल में विस्तार सबसे धीमी चाल से हुआ।

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