मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज समुद्री मार्ग से आने वाली सप्लाई बाधित होने के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात करीब 90% तक बढ़ा दिया। हालांकि इस दौरान देश के कुल क्रूड आयात में लगभग 15% की गिरावट दर्ज की गई।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के पहरा बैठाने के चलते भारत की पारंपरिक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। पूरी दुनिया की करीब 20 प्रतिशत क्रूड सप्लाई इसी होर्मुज समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है।
इस संकट के चलते भारत को वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करना पड़ा। रूस इस मामले में सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभरा, जहां से सस्ती और पर्याप्त उपलब्ध सप्लाई ने भारतीय रिफाइनरियों को राहत दी।
रूस बना फिर से प्रमुख सप्लायर
दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच रूस से क्रूड की खरीद तुलनात्मक रूप कम रही थी, लेकिन मार्च में इसमें तेज उछाल देखने को मिला। एक्सपर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी छूट और ग्लोबल सप्लाई पर आए दबाव के चलते भारत ने रूस से खरीद तेजी से बढ़ाई।
केप्लर के एनालिस्ट्स सुमित रितोलिया ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि, मिडिल ईस्ट में आई रुकावटों के बावजूद कुछ राहत पाइपलाइन रूट्स से मिली। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की हबशन-फुजैराह लाइन जैसे विकल्पों ने सीमित सप्लाई जारी रखने में मदद की।
आगे भी जारी रह सकती है रूस से खरीद
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अप्रैल में भी रूस से कच्चे तेल की खरीद मजबूत बनी रह सकती है। इसके अलावा, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से संभावित सप्लाई भी भारत के लिए जोखिम को कम कर सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि मिडिल ईस्ट में तनाव कितना लंबा चलता है और होर्मुज जलडमरूमध्य कब तक प्रभावित रहता है।
LNG और LPG में बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, कतर से LNG आयात में करीब 92% की भारी गिरावट आई, जिसका कारण फोर्स मेज्योर और क्षेत्रीय संकट रहा। हालांकि इस कमी को आंशिक रूप से अमेरिका, ओमान, अंगोला और नाइजीरिया से बढ़ी सप्लाई के जरिए संतुलित किया गया।
LPG की कमी को दूर करने के लिए भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाया और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल पर नियंत्रण रखा, ताकि 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त सप्लाई मिलती रहे।
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