मुश्किल में स्मार्टफोन मार्केट! 2026 में घट सकती है बिक्री, कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी बन रही वजह
Smartphone Sales Decline: भारत का स्मार्टफोन बाजार 2026 में दबाव में रह सकता है। बढ़ती कीमतों, मेमोरी चिप संकट और धीमे रिप्लेसमेंट के चलते बिक्री घटने की आशंका है। वॉल्यूम सुस्त है, जबकि प्रीमियमाइजेशन के कारण वैल्यू ग्रोथ बनी हुई है। जानिए डिटेल।
एनालिस्ट्स का मानना है कि 2026 स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए और चुनौतीपूर्ण होगा।
Smartphone Sales Decline: भारत का स्मार्टफोन बाजार 2026 में काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। इंडस्ट्री के ताजा अनुमान बताते हैं कि 2025 में भी स्मार्टफोन की मांग लगभग ठहरी रही। अब नए और पुराने स्मार्टफोन मॉडल्स की बढ़ती कीमतों के चलते हालात और बिगड़ सकते हैं।
IDC और Counterpoint Research के मुताबिक, 2025 में स्मार्टफोन शिपमेंट करीब 15.1 से 15.3 करोड़ यूनिट के बीच रही। यानी या तो ग्रोथ शून्य रही या फिर करीब 1 प्रतिशत की गिरावट आई।
लगातार चौथा साल बिना ग्रोथ के
Counterpoint Research के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का कहना है कि यह लगातार चौथा साल है, जब बाजार करीब 15.2 करोड़ यूनिट पर ही अटका हुआ है।
इसकी बड़ी वजह यह है कि लोग अब अपने स्मार्टफोन ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। फीचर फोन से स्मार्टफोन में अपग्रेड की रफ्तार धीमी हो गई है। इसके साथ ही सेकेंड हैंड और रिफर्बिश्ड फोन का बाजार भी तेजी से बढ़ा है, जिससे नए स्मार्टफोन की बिक्री प्रभावित हुई है।
भारत में मांग सुस्त, एक्सपोर्ट बना सहारा
जहां घरेलू बाजार में सुस्ती है, वहीं भारत से स्मार्टफोन का एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में स्मार्टफोन एक्सपोर्ट करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2024 के मुकाबले 47 प्रतिशत ज्यादा है।
इस उछाल में सबसे बड़ा योगदान Apple का रहा। साल 2025 में iPhone एक्सपोर्ट की वैल्यू 22 अरब डॉलर से ज्यादा रही, यानी कुल एक्सपोर्ट का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा।
दिसंबर तिमाही में और गहरी गिरावट
2025 की दिसंबर तिमाही में कमजोरी और साफ दिखी। Counterpoint के मुताबिक, इस दौरान शिपमेंट सालाना आधार पर 8 से 10 प्रतिशत तक घटकर 3.2 से 3.4 करोड़ यूनिट रह गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 3.6 करोड़ यूनिट थी।
IDC की सीनियर रिसर्च मैनेजर उपासना जोशी का कहना है कि गिरावट उम्मीद से थोड़ी कम रही, क्योंकि कंपनियों ने आने वाली कीमत बढ़ोतरी से पहले ज्यादा शिपमेंट की थी। फिर भी, यह साफ है कि यह सुस्ती अब सिर्फ सीजनल नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल बनती जा रही है।
2026 में और मुश्किलें बढ़ने की आशंका
एनालिस्ट्स का मानना है कि 2026 स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए और चुनौतीपूर्ण होगा। Counterpoint को जहां करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दिख रही है, वहीं IDC का अनुमान है कि शिपमेंट घटकर 14.5 से 14.7 करोड़ यूनिट तक आ सकती है।
इसका सबसे बड़ा कारण मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज और लगातार बढ़ोतरी है। खासतौर पर 15,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स पर इसका असर ज्यादा पड़ने की उम्मीद है।
कंपनियां कैसे झेल रही हैं बढ़ती लागत
बढ़ती लागत से निपटने के लिए कंपनियां अलग-अलग रास्ते अपना रही हैं। कुछ ब्रांड कीमतें बढ़ा रहे हैं, कुछ कैशबैक और ऑफर्स घटा रहे हैं, तो कुछ नए मॉडल्स में मार्जिन कम करके लागत का बोझ खुद उठा रहे हैं।
Xiaomi इंडिया के COO सुधिन माथुर के मुताबिक, लो-प्राइस सेगमेंट में मांग पर असर दिख सकता है, लेकिन मिड और प्रीमियम सेगमेंट अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में 60 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्टफोन खरीद फाइनेंस के जरिए होती है, जिससे कीमत बढ़ने का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।
वॉल्यूम भले न बढ़े, वैल्यू बढ़ रही है
भले ही यूनिट बिक्री ठहरी हुई हो, लेकिन स्मार्टफोन बाजार की वैल्यू लगातार बढ़ रही है। 2025 में एवरेज सेलिंग प्राइस करीब 9 से 10 प्रतिशत बढ़ा, जिससे कुल बाजार वैल्यू में लगभग 10 प्रतिशत की ग्रोथ हुई।
IDC का अनुमान है कि 2026 में भी ASP करीब 5 प्रतिशत बढ़ सकता है, जिससे यूनिट घटने के बावजूद बाजार वैल्यू मिड-सिंगल डिजिट में बढ़ती रह सकती है।
चीनी ब्रांड्स की पकड़ अब भी मजबूत
2025 में चीनी ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी करीब 73 प्रतिशत रही, जो पिछले साल के 74 प्रतिशत से थोड़ी कम है। फिर भी, बड़े पैमाने पर ऑपरेशन और सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ के चलते इन्हें कंपोनेंट्स और लागत मैनेजमेंट में बढ़त मिल रही है।
अब मुकाबला हार्डवेयर से आगे बढ़ेगा
Counterpoint का कहना है कि 2026 में मुकाबला सिर्फ कैमरा या प्रोसेसर तक सीमित नहीं रहेगा। ऑपरेटिंग सिस्टम का अनुभव, AI आधारित फीचर्स और कैमरा सॉफ्टवेयर जैसे पहलू अपग्रेड को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर, भारत का स्मार्टफोन बाजार इस वक्त एक लो-ग्रोथ साइकिल में फंसा नजर आ रहा है। कीमतें ऊपर जा रही हैं, फोन बदलने का अंतराल बढ़ रहा है और वॉल्यूम में मजबूत वापसी अभी दूर दिखाई दे रही है।