भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता साइन होने के बाद भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार 12 फरवरी को एक कार्यक्रम के दौरान ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिका से आयात की गई कपास से बने कपड़ों पर भारत को 'जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ' की सुविधा मिल सकती है। इससे भारतीय गारमेंट निर्यातकों को अमेरिका के बाजार में कॉम्पिटीशन करने में फायदा होगा।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच यह अंतरिम समझौता मार्च के आसपास साइन होने की उम्मीद है।
इसका मतलब है कि नए ट्रेड डील के बाद भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट के एक्सपोर्ट पर अमेरिका जवाबी टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर देगा। लेकिन जो कपड़े अमेरिका से खरीदी गई कपास से बनाए जाएंगे, उन्हें जवाबी शुल्क के हिस्से में पूरी तरह से छूट यानी जीरो ड्यूटी मिलेगी।
हालांकि, ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) टैरिफ पहले की तरह लागू रहेगा, क्योंकि कटौती सिर्फ जवाबी टैरिफ वाले हिस्से में की जा रही है। ऐसे में अमेरिकी कपास से बने कपड़ों पर कुल प्रभावी टैरिफ घटकर करीब 3% रह जाएगा।
बांग्लादेश समझौते के बाद बढ़ी थी चिंता
पीयूष गोयल का यह बयान यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में बेहतर शर्तें हासिल की हैं, जिसके बाद भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों में चिंता बढ़ गई थी। बांग्लादेश-अमेरिका समझौते के तहत ढाका को करीब 19% का कम रियायती रिसिप्रोकल टैरिफ मिला है। लेकिन इसके साथ में अमेरिका की कपास और फाइबर से बने कुछ रेडीमेड गारमेंट्स को जीरो ड्यूटी की सुविधा भी दी गई है।
अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान बांग्लादेश का अमेरिका को रेडीमेड गारमेंट का एक्सपोर्ट करीब 7.6 अरब डॉलर रहा, जो इसी अवधि में भारत के 3.26 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट से दोगुने से भी ज्यादा है।
किसानों के हित सुरक्षित: गोयल
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि भारत में पैदा होने वाले करीब 90% से 95% कृषि उत्पादों को अमेरिका के साथ इस व्यापार समझौते से बाहर रखा गया है। उन्होंने दोहराया कि इस समझौते में किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है।
भारत ने कई संवेदनशील कृषि और खाद्य उत्पादों को टैरिफ में छूट से बाहर रखा है। इनमें चावल और गेहूं जैसे मुख्य अनाज, डेयरी उत्पाद, दालें, खाद्य तेल और कुछ फल-सब्जियां शामिल हैं। ऐसा घरेलू किसानों और खाद्य सुरक्षा की रक्षा के लिए किया गया है।
हालांकि, कुछ उत्पादों पर रियायत दी गई है। इनमें बादाम, अखरोट, पिस्ता, सेब, क्रैनबेरी और सोयाबीन तेल शामिल हैं। इन पर छूट मुख्य रूप से टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) के तहत दी गई है, यानी तय सीमा तक कम टैरिफ पर इंपोर्ट की अनुमति होगी।
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