भारत, अमेरिका की इनवेस्टमेंट फर्म टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट के खिलाफ टैक्स प्रोसीडिंग्स फिर से शुरू करेगा। फ्लिपकार्ट में 2018 में कंपनी की हिस्सेदारी बिक्री से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह कदम उठाया जाने वाला है। 2018 में टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट में अपनी पूरी हिस्सेदारी वॉलमार्ट इंक. को बेचकर एग्जिट कर गई थी। बदले में 14500 करोड़ रुपये हासिल किए थे। इस बिक्री से टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट ने कैपिटल गेन्स कमाया, जिस पर अब आयकर विभाग टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा है कि टाइगर ग्लोबल को हासिल हुआ कैपिटल गेन्स भारत के कानून के तहत टैक्सेबल है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, टाइगर ग्लोबल से जुड़े मामले में कानूनी स्तर पर अंतिम फैसला आने तक टैक्स के आकलन की कार्रवाई रोककर रखी गई थी। लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है तो कर निर्धारण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
2018 में अमेरिकी रिटेलर वॉलमार्ट इंक ने फ्लिपकार्ट में कंट्रोलिंग स्टेक करीब 16 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीदा था। सौदे के तहत टाइगर ग्लोबल की मॉरीशस स्थित 3 इकाइयों ने फ्लिपकार्ट में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेची थी। इससे उन्हें 14,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली और खासा पूंजीगत लाभ हुआ। लेनदेन के समय टाइगर ग्लोबल ने इस पूंजीगत लाभ यानि कि कैपिटल गेन्स पर भारत में टैक्स देनदारी न होने का दावा करते हुए 'स्रोत पर कर कटौती' (TDS) से छूट मांगी थी।
TDS का आकलन करने वाले अधिकारी ने प्रथम दृष्टया जांच के बाद कम दर पर टैक्स कटौती के प्रमाणपत्र दिए, क्योंकि कंपनी का नियंत्रण मॉरीशस में होने का स्पष्ट सबूत नहीं मिला। इस आधार पर लगभग 967.52 करोड़ रुपये का TDS काटा गया। यह टैक्स कटौती अंतिम कर निर्धारण नहीं होकर एक अंतरिम व्यवस्था थी क्योंकि टैक्स देनदारी बनती है या नहीं, यही विवादित था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैक्स असेसमेंट ऑफिसर न्यायिक निर्देशों के अनुरूप कर निर्धारण पूरा करेंगे। इसके साथ ही TDS के रूप में रोकी गई करीब 967.52 करोड़ रुपये की रिफंड राशि का निपटारा भी आकलन और उसके बाद की मांग प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
ग्लोबल निवेशकों के लिए बढ़ सकती है अनिश्चितता
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि रेवेन्यू डिपार्टमेंट टैक्स वसूलने के लिए टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बात के लिए एक मिसाल बन सकता है कि भारत ऑफशोर बिक्री पर टैक्स संधियों को कैसे लागू करता है। लेकिन साथ ही कैपिटल गेन्स पर स्पष्टता चाहने वाले ग्लोबल निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ सकती है।