अमेरिका में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता ने भारत के टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और सीफूड सेक्टर के बड़े निर्यातकों को मुश्किल में डाल दिया है। इंडस्ट्री के लोगों ने बताया कि सप्लायर्स अभी शिपमेंट भेजने से पहले ट्रेड नियमों और ड्यूटी स्ट्रक्चर पर साफ स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। जब तक यह स्पष्ट नहीं होता, तब तक माल भेजने में सतर्कता बरती जा रही है।
अदालत का फैसला और ट्रंप का नया संकेत
शुक्रवार को एक अमेरिकी अदालत ने International Emergency Economic Powers Act यानी IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया। इससे उस कानून के आधार पर हुए ट्रेड समझौतों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए।
लेकिन फैसले के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वे Trade Act 1974 की Section 122 के तहत ग्लोबल टैरिफ लगाएंगे। पहले यह दर 10 प्रतिशत बताई गई थी, जिसे अगले ही दिन बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।
इस उतार चढ़ाव ने निर्यातकों को सप्लाई बढ़ाने के बजाय इंतजार और स्थिति पर नजर रखने की रणनीति अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
झींगा निर्यातक शिपमेंट रोक कर बैठे
सीफूड एक्सपोटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी SEAI के नेशनल प्रेसिडेंट और Sprint Exports Pvt Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर Gunturu Pawan Kumar ने बताया कि खरीदारों के कहने पर झींगा निर्यातकों ने फिलहाल शिपमेंट रोक दी है।
उन्होंने कहा कि ड्यूटी को लेकर काफी भ्रम है और अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। सभी Customs and Border Protection यानी CBP की वेबसाइट पर अपडेट का इंतजार कर रहे हैं, जो एक या दो दिन में आ सकता है। उनका कहना है कि अभी मांग का अंदाजा लगाना जल्दबाजी होगी, क्योंकि ऑर्डर काफी धीमे हैं। फिलहाल खरीदार टैरिफ रिफंड को लेकर सवाल पूछ रहे हैं, क्योंकि अदालत के फैसले के बाद IEEPA को अवैध माना गया है।
अब तक CBP ने अपने Cargo System Management Service को अपडेट नहीं किया है, ताकि IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ हटाए जा सकें। अमेरिका को झींगा भारत का सबसे बड़ा कृषि निर्यात है। वित्त वर्ष 25 में यह 2.4 बिलियन डॉलर का रहा, जबकि कुल कृषि निर्यात 5.9 बिलियन डॉलर था।
जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर ने भी रोकी सप्लाई
करीब 10 बिलियन डॉलर के निर्यात वाले जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर ने भी कम से कम एक हफ्ते के लिए शिपमेंट रोकने का फैसला किया है। वे बदलती ट्रेड स्थिति को समझना चाहते हैं और साफ नीति दिशा का इंतजार कर रहे हैं।
Gem & Jewellery Export Promotion Council के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Sabyasachi Ray ने कहा कि अगर दरें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो यह सेक्टर बेहतर स्थिति में रह सकता है, क्योंकि हीरों के निर्यात में भारत अग्रणी है। फिर भी निर्यातक एक हफ्ते तक इंतजार करना चाहते हैं, ताकि यह समझ सकें कि दरें क्या तय होंगी और ट्रंप आगे कौन सी रणनीति अपनाएंगे।
टेक्सटाइल निर्यातक भी सतर्क
टेक्सटाइल सेक्टर भी फिलहाल सावधानी बरत रहा है। इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि नई टैरिफ दरों ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुए ट्रेड समझौते से मिलने वाला प्रतिस्पर्धात्मक लाभ खत्म कर दिया है।
Clothing Manufacturers Association of India के चीफ मेंटर राहुल मेहता ने कहा कि बिजनेस कठिन हालात में भी चल सकता है, लेकिन अनिश्चित हालात में टिकना मुश्किल होता है। उनका कहना है कि आज किसी भी निर्यातक से बात करें तो जवाब यही मिलेगा कि हम इंतजार कर रहे हैं। पहले उम्मीद थी कि कुछ देशों के मुकाबले बढ़त मिलेगी, लेकिन अब सभी लगभग बराबरी की स्थिति में खड़े नजर आ रहे हैं।