इंडिगो ने देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनी बनने के लिए खास स्ट्रेटेजी अपनाई थी। उसने कॉस्ट कम से कम रखने पर फोकस किया। एयरक्राफ्ट का मैक्सिमम इस्तेमाल किया। इसका फायदा कंपनी को मिला। उसकी बाजार हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा हो गई। कंपनी ने हवाई सेवाओं की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए 900 से ज्यादा एयरबस के ऑर्डर दिए। रोजाना 2,100 से ज्यादा फ्लाइट्स ऑपरेट करने वाली इस कंपनी पर अब सेफ्टी के नए नियमों और वर्कफोर्स पर बढ़ते दबाव का असर पड़ता दिख रहा है।
दूसरी एयरलाइंस के मुकाबले इंडिगो एयक्राफ्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल करती है
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि Indigo का यूटिलाइजेशन लेवल बाकी मार्केट से काफी ज्यादा रहा है। एयर इंडिया जैसी फुल-सर्विस एयरलाइन आम तौर पर अपने फ्लीट्स का इस्तेमाल रोजाना 10 घंटे से कम समय तक करती है। इंडिगो अपने एयरक्राफ्ट्स का रोजाना 11-13 घंटे इस्तेमाल करती रही है। नए नियमों के लागू होने पर क्रू के आराम करने का समय बढ़ गया है। इसका असर इंडिगो की सेवाएं पर पड़ रहा है।
इंडिगो की प्रत्येक सीट की कॉस्ट दूसरी एयरलाइंस के मुकाबले काफी कम
व्यस्त घरेलू रूट पर इंडिगो की स्ट्रेटेजी 30 मिनट से कम टर्नअराउंड टाइम की रही है। इससे कंपनी को प्रत्येक एयरक्राफ्ट्स का इस्तेमाल ज्यादा फ्लाइट्स के लिए करने में मदद मिली है। इससे कंपनी की प्रोडक्टविटी बढ़ी है। इससे दूसरी एयरलाइन कंपनियों के मुकाबले इंडिगो की प्रति सीट की कॉस्ट रही है। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि इस मॉडल में घड़ी की सूई का काफी ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। एक फ्लाइट्स में देरी का असर पूरे फ्लाइट नेटवर्क पर पड़ता है।
डीजीसीए के नए नियमों का असर इंडिया की सेवाओं पर पड़ रहा
पायलट्स में थकान की समस्या बढ़ने के बाद डीजीसीए ने आराम करने के समय को बढ़ा दिया। हर सप्ताह आराम के घंटों को 36 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया है। नाइट-ड्यूटी विंडो को बढ़ाया गया है। कुल ड्यूटी और नाइट लैंडिंग की सीमा सख्त कर दी गई है। रोस्टर पीरियड में पायलट की नाइट लैंडिंग की संख्या में कमी की गई है। इसका सीधा असर इंडिगो के ऑपरेशंस पर पड़ा है। इंडिगो को पिछले कुछ हफ्तों में फ्लाइट्स की संख्या में कमी करनी पड़ी है।
सुबह में एक फ्लाइट में देरी का असर पूरे दिन के फ्लाइट शिड्यूल पर
एनालिस्ट्स का कहना है कि इंडिगो को अब स्ट्रक्चरल इश्यू से जूझना पड़ रहा है। काफी सुबह की फ्लाइट्स में देरी का असर पूरे दिन के फ्लाइट्स शिड्यूल पर पड़ रहा है। इससे इंडिगों के यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। स्टॉफिंग मॉडल पर भी दबाव दिखा है। पायलट के आराम करने का समय बढ़ जाने से इंडिगो को अब सेवाओं के लिए सैकड़ों ज्यादा पायलट्स चाहिए। ऐसा तब हो रहा है, जब पिले दो सालों में पायलट और केबिन क्रू की सैलरी में काफी इजाफा हुआ है।