आईफोन बनाने वाली Foxconn बेंगलुरु में ₹5,740 करोड़ के निवेश से लगाएगी नया प्लांट, 1 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

एपल के लिए आईफोन (Apple iPhone0 बनाने वाली दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी (Foxconn Technology) भारत में 5,740 करोड़ रुपये (70 करोड़ डॉलर) की लागत से अपना एक नया प्लांट खोलने की तैयारी में है, जिससे कंपनी यहां अपने उत्पादन को बढ़ा सके

अपडेटेड Mar 03, 2023 पर 4:18 PM
यह भारत में फॉक्सकॉन के अब तक के सबसे बड़े एकल निवेश में से एक हो सकता है

एपल के लिए आईफोन (Apple iPhone) बनाने वाली दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी (Foxconn Technology) भारत में 5,740 करोड़ रुपये (70 करोड़ डॉलर) की लागत से अपना एक नया प्लांट खोलने की तैयारी में है, जिससे कंपनी यहां अपने उत्पादन को बढ़ा सके। ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। फॉक्सकॉन का यह कदम बताता अमेरिका और चीन (China) में बढ़ते तनाव के बीच कई प्रमुख ग्लोबल कंपनियां अपने मैन्युफैक्चरिंग को चीन से बाहर ले जा रही हैं।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह ताइवानी कंपनी आईफोन के पार्ट्स बनाने के लिए बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास 300 एकड़ के जमीन में एक प्लांट लगाने की योजना में है। सूत्रों का कहना है कि इस प्लांट में एपल के हैंडसेट को भी असेंबल किया जा सकता है। इसके अलावा फॉक्सकॉन इस प्लांट का इस्तेमाल अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल बिजनेस के कुछ पार्ट्स को बनाने में भी कर सकती है।

यह निवेश भारत में फॉक्सकॉन के अब तक के सबसे बड़े एकल निवेश में से एक हो सकता है। साथ ही ये भी बताता कि कैसे चीन को कंज्यूमर्स इलेक्ट्रॉनिक्स के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में अपनी पोजिशन खोने का खतरा है।


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एपल और अन्य अमेरिकी ब्रांड्स चीन के सप्लायर्स पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत और वियतनाम जैसे देशों में वैकल्पिक लोकेशन खोज रहे हैं। यह एक तरह से ग्लोबल सप्लाई चेन पर पुनर्विचार है, जिसमें कोरोना महामारी और फिर रूस-यूक्रेन जंग के बाद तेजी आई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फॉक्सकॉन के नए प्लांट से बारत में करीब 1 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। फॉक्सकॉन का प्रमुख प्लांट इस समय चीन के झेंग्झौ शहर में है, जहां आईफोन को अंसेबल किया जाता है। इस प्लांट में करीब 2 लाख लोग काम करते हैं और उत्पादन के पीक सीजन में यह संख्या बढ़ भी जाती है।

इस झेंग्झौ प्लांट में कोरोना लॉकडाउन से जुड़े नियमों के कारण पिछले 2 साल से भी अधिक समय से उत्पादन प्रभावित है। इसने एपल को अपने सप्लाई चेन पर फिर से सोचने के लिए मजूबर किया और वह अब चीन पर निर्भरता कम करने के लिए दूसरे देशों की तरफ देख रही है।

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