क्या पर्सनल लोन पर भी टैक्स लगता है? जानिए पूरी हकीकत और इन पहलुओं को न करें नजरअंदाज
पर्सनल लोन इंस्टेंट फाइनेंशियल सॉल्यूशन देते हैं. लेकिन ब्याज दर, रीपेमेंट टर्म्स और टैक्स डिडक्शन की समझ आपको एक समझदारी भरा फैसला लेने में मदद कर सकती है.
जब फंड की अचानक जरूरत पड़ जाए, तब पर्सनल लोन एक आसान और इंस्टेंट फाइनेंशियल सॉल्यूशन के रूप में सामने आता है. आज के डिजिटल दौर में इंस्टेंट पर्सनल लोन पाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. चाहे मेडिकल इमरजेंसी हो, घर का रेनोवेशन, महंगी खरीदारी या कोई अचानक आया खर्च, इन सभी के लिए पर्सनल लोन एक भरोसेमंद ऑप्शन बन चुका है.
लेकिन जब भी कोई पर्सनल लोन लेने की सोचता है, तब उसके मन में सबसे पहले ये सवाल आता है: क्या इस पर भी कोई टैक्स लगता है? और अगर हां, तो फाइनेंशियल प्लानिंग पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
इस आर्टिकल में हम पर्सनल लोन से जुड़ी ब्याज दरों, टैक्स लायबिलिटी और रीपेमेंट टर्म्स के बारे में विस्तार से बता रहे हैं.
पर्सनल लोन क्या है?
पर्सनल लोन शादी, गैजेट्स की खरीदारी, बच्चों की पढ़ाई, ट्रैवल प्लान या घर के रेनोवेशन जैसे निजी खर्चों को पूरा करने के लिए लिया जाता है. बहुत से लोग अपने पुराने कर्ज को चुकाने के लिए भी पर्सनल लोन लेते हैं.
ये आमतौर पर अनसिक्योर्ड लोन होते हैं, यानी इसके लिए कोई प्रॉपर्टी गिरवी रखने या गारंटी की जरूरत नहीं होती. यही वजह है कि पर्सनल लोन की ब्याज दरें होम लोन या गोल्ड लोन जैसे सिक्योर्ड लोन की तुलना में थोड़ी ज्यादा होती हैं.
बैंक और NBFCs आमतौर पर आपके क्रेडिट स्कोर और इनकम के आधार पर लोन ऑफर करते हैं. अब तो डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स के आने से पर्सनल लोन लेना और भी आसान हो गया है. आप अपनी जरूरत और एलिजिबिलिटी के अनुसार लोन अमाउंट और टेन्योर चुन सकते हैं.
मनीकंट्रोल पर आप टॉप लेंडर्स से 50 लाख रुपए तक का पर्सनल लोन ले सकते हैं. इसकी ऐप और वेबसाइट पर आप एक ही जगह पर कई ऑफर्स की तुलना कर सकते हैं. इन पर ब्याज दरें सिर्फ 10.5% सालाना से शुरू होती हैं और पूरा प्रोसेस पेपरलेस है. आपको बस तीन आसान स्टेप पूरे करने हैं: अपनी डिटेल भरें, KYC पूरी करें और EMI सेट करें.
क्या पर्सनल लोन पर टैक्स देना पड़ता है?
पर्सनल लोन को इनकम नहीं बल्कि एक लायबिलिटी माना जाता है, इसलिए इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत इस पर कोई टैक्स नहीं लगता.
हालांकि, इसके रीपेमेंट पर आप टैक्स डिडक्शन का क्लेम नहीं कर सकते. लेकिन अगर आप किसी प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए लोन लेते हैं, तो उस पर दिए गए ब्याज पर सेक्शन 24(b) के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है. इसी तरह अगर आपने इस लोन का इस्तेमाल किसी बिजनेस में निवेश के लिए किया और नुकसान हुआ, तो भी कुछ हद तक टैक्स छूट मिल सकती है, बशर्ते कि आप साफ-साफ दिखा सकें कि आपने पर्सनल लोन का कितना हिस्सा बिजनेस में लगाया या घर बनाने में खर्च किया है. ITR भरते समय इसके सबूत देने पड़ते हैं.
लेकिन अगर आप इस लोन का इस्तेमाल निजी खर्चों जैसे ट्रैवल या शॉपिंग के लिए करते हैं, तो उस पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा.
भले ही पर्सनल लोन पर कोई टैक्स न देना पड़ता हो, लेकिन कुछ और जरुरी बातें भी हैं जिन्हें ध्यान में रखकर आप कुल कॉस्ट को कम कर सकते हैं.
हालांकि, पर्सनल लोन पर टैक्स नहीं लगता, फिर भी कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखकर आप इसके कुल खर्च को कम कर सकते हैं:
कई ऑफर्स की तुलना करें: मार्केट में मौजूद अलग-अलग बैंक और NBFCs के लोन ऑफर्स की तुलना करें और अपनी जरूरत और क्रेडिट प्रोफाइल के मुताबिक सबसे बेहतर ऑफर चुनें.
मुख्य फैक्टर्स की तुलना करें: लोन अमाउंट, ब्याज दर और रीपेमेंट टेन्योर को ध्यान में रखकर सोच-समझकर फैसला लें.
सबसे सस्ती ब्याज दर चुनें: ब्याज दर ही तय करती है कि आपका लोन महंगा पड़ेगा या सस्ता. आम तौर पर पर्सनल लोन की ब्याज दरें 10% से 36% सालाना के बीच होती हैं.
EMI का चुनाव सोच-समझकर करें: वैसे तो इसमें फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है, फिर भी अपनी मंथली इनकम को ध्यान में रखकर EMI तय करें. लंबी पीरियड से EMI कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ सकता है.
हिडेन चार्ज पर नजर रखें: प्रोसेसिंग फीस, डॉक्युमेंटेशन चार्ज और अन्य हिडेन चार्ज की जानकारी पहले ही लें.
निष्कर्ष
जब आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो पर्सनल लोन एक शानदार ऑप्शन हो सकता है. अच्छी बात यह है कि इस पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता. लेकिन फाइनेंशियल डिसिप्लिन बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि आप कर्ज के जाल में न फंसें. अगर लोन को किसी खास मकसद जैसे बिजनेस या घर बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो टैक्स छूट का फायदा भी मिल सकता है. हालांकि, लोन तभी लें जब वाकई इसकी जरूरत हो. मनीकंट्रोल ऐप या वेबसाइट पर आप पा सकते हैं Rs, 50 लाख तक के इंस्टेंट लोन ऑफ़र्स भारत के टॉप लेंडर्स से.