क्या पर्सनल लोन के साथ इंश्योरेंस भी लेना चाहिए? पर्सनल लोन इंश्योरेंस से जुड़े फायदे और जरूरी जानकारी यहां पढ़ें
पर्सनल लोन इंश्योरेंस मृत्यु, अपंगता या गंभीर बीमारी जैसी अनहोनी की स्थिति में फाइनेंशियल सुरक्षा देता है. भले ही यह एक ऑप्शनल एड-ऑन हो, लेकिन यह बॉरोअर और उसके परिवार के लिए राहत का काम करता है.
पर्सनल लोन आपकी अचानक आई फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है. जरुरत के समय जब पैसा कम पड़ जाए, तब पर्सनल लोन एक सुविधाजनक ऑप्शन के रूप में सामने आता है. हालांकि, अगर लोन चुकाने की सही प्लानिंग पहले से न की जाए, तो यह एक बड़ा फाइनेंशियल बोझ भी बन सकता है.
दरअसल, पर्सनल लोन अक्सर ऊंची ब्याज दरों पर मिलते हैं, इसलिए इनकी EMI चुकाना कई बार बोझ बन जाता है. समय पर लोन न चुकाने पर ज्यादा ब्याज, लेट फीस और बाकी चार्जेस देने पड़ सकते हैं, जो आगे चलकर बॉरोअर के लिए फाइनेंशियल संकट का कारण बन सकता है.
ऐसे में, खुद को भविष्य की अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखने के लिए पर्सनल लोन के साथ-साथ इंश्योरेंस लेना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है. पर्सनल लोन इंश्योरेंस आपके मौजूदा लोन से जुड़ी लायबिलिटी को कवर करने में मदद कर सकता है.
पर्सनल लोन इंश्योरेंस क्या है?
'पर्सनल लोन इंश्योरेंस' या 'पर्सनल लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस' एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट है, जो किसी अनचाही या अनिश्चित घटना के होने पर लोन चुकाने (नियम और शर्तों के अधीन) में मदद करता है. अगर बॉरोअर की मृत्यु, गंभीर बीमारी या अपंगता जैसी अनिश्चित स्थिति बनती है, तो यह इंश्योरेंस बाकी बचा हुआ लोन कवर करता है. यह मुश्किल समय में आपके और आपके परिवार के लिए एक फाइनेंशियल सुरक्षा का कवच बन जाता है.
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है. इसका सीधा जवाब है - नहीं. पर्सनल लोन के साथ इंश्योरेंस लेना जरूरी नहीं है. यह एक ऑप्शनल ऐड-ऑन होता है. आपको अपनी फाइनेंशियल स्थिति को ध्यान में रखते हुए तय करना चाहिए कि लोन इंश्योरेंस लेना चाहिए या नहीं. कई बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) लोन पास करते समय एक प्रीमियम पर यह इंश्योरेंस देती हैं. आमतौर पर यह इंश्योरेंस पूरे लोन पीरियड के लिए कवर देता है.
पर्सनल लोन इंश्योरेंस के फायदे
मानसिक सुकून: जब आपके ऊपर पर्सनल लोन जैसा कोई फाइनेंशियल बोझ हो, तो इंश्योरेंस एक तरह से मानसिक सुकून देता है. किसी अनहोनी की स्थिति में आपका परिवार कर्ज के बोझ तले नहीं दबेगा.
परिवार की फाइनेंशियल सुरक्षा: अगर लोन लेने वाले की मृत्यु या अपंगता जैसी कोई स्थिति बन जाती है, तो यह इंश्योरेंस सुनिश्चित करता है कि लोन चुकाने की जिम्मेदारी परिवार पर न आए.
सस्ता प्रीमियम: पर्सनल लोन इंश्योरेंस आमतौर पर किफायती होते हैं. यह प्रीमियम आपके लोन अमाउंट के मुकाबले काफी कम होता है, लेकिन यह आपके परिवार को बड़ी राहत दे सकता है.
कस्टमाइज्ड ऑप्शन: आजकल इंश्योरेंस कंपनियां आपकी जरूरत और लोन अमाउंट के हिसाब से कस्टमाइज्ड इंश्योरेंस प्लान ऑफर करती हैं, जिससे आपको ज्यादा प्रीमियम नहीं देना पड़ता.
प्रीमियम पेमेंट में फ्लेक्सिबिलिटी: अब कई बैंक या लेंडर्स यह सुविधा दे रहे हैं कि आप इंश्योरेंस प्रीमियम को या तो लोन अमाउंट से कटवा सकते हैं या लोन EMI के साथ दे सकते हैं.
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पर्सनल लोन इंश्योरेंस के प्रकार
लेंडर्स आमतौर पर दो तरह की पॉलिसियां ऑफर करते हैं: टर्म इंश्योरेंस और क्रिटिकल इलनेस कवर.
टर्म इंश्योरेंस: अगर लोन पीरियड के दौरान बॉरोअर की मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी को एक तय इंश्योरेंस अमाउंट दिया जाता है. यह अमाउंट आमतौर पर बकाया लोन के बराबर होता है.
क्रिटिकल इलनेस कवर: अगर बॉरोअर को कोई गंभीर बीमारी हो जाती है, तो यह इंश्योरेंस एक तय अमाउंट देता है ताकि लोन चुकाने में आसानी हो.
सही पर्सनल लोन इंश्योरेंस कैसे चुनें?
कई ऑप्शंस में से सही इंश्योरेंस चुनना चुनौतीभरा हो सकता है. ये टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं:
फाइनेंशियल स्थिति का मूल्यांकन करें: अपने परिवार की जरूरतों, लोन अमाउंट और इनकम के हिसाब से इंश्योरेंस चुनें.
ऑप्शंस की तुलना करें: अलग-अलग कंपनियों के इंश्योरेंस प्लान के प्रीमियम, कवरेज और सुविधाओं की तुलना करें.
क्लेम सेटलमेंट रेशियो देखें: जिस कंपनी से इंश्योरेंस ले रहे हैं, उसका क्लेम सेटलमेंट रेशियो ज्यादा होना चाहिए.
नियम और शर्तें पढ़ें: पॉलिसी डॉक्यूमेंट को अच्छे से पढ़ें और शर्तों को समझें ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो.
निष्कर्ष
पर्सनल लोन इंश्योरेंस एक एहतियाती कदम है, जो भविष्य में संभावित फाइनेंशियल मुश्किलों से आपको और आपके परिवार को बचा सकता है. इसे लेना जरुरी तो नहीं है, लेकिन ज्यादा महंगा भी नहीं है. अगर आप पर्सनल लोन ले रहे हैं, तो साथ में इंश्योरेंस लेने के बारे में जरूर सोचें.
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