March IIP Data: भारत की इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज मार्च 2026 में बढ़ी जरूर, लेकिन रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई। 28 अप्रैल को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फैक्ट्री आउटपुट में सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यानी इंडस्ट्री आगे बढ़ रही है, लेकिन पहले जैसी तेजी नहीं दिख रही।
फरवरी के मुकाबले रफ्तार धीमी
अगर पिछले महीने से तुलना करें तो मार्च में ग्रोथ कम रही। फरवरी में इंडस्ट्रियल ग्रोथ 5.2 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई है। इसका मतलब है कि गतिविधि जारी है, लेकिन उसकी स्पीड कम हो रही है।
मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग ने संभाला मोर्चा
इस ग्रोथ को सबसे ज्यादा सहारा मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर से मिला। मैन्युफैक्चरिंग में 4.3 प्रतिशत और माइनिंग में 5.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
वहीं बिजली उत्पादन की ग्रोथ सिर्फ 0.8 प्रतिशत रही, जिसने कुल ग्रोथ की रफ्तार को थोड़ा नीचे खींच लिया।
किन सेक्टर में दिखी मजबूती
मैन्युफैक्चरिंग के अंदर 23 में से 14 इंडस्ट्री ग्रुप्स में बढ़ोतरी देखी गई। इसमें मेटल, ऑटोमोबाइल और मशीनरी सेक्टर आगे रहे।
ऑटो कंपोनेंट्स, कमर्शियल व्हीकल्स और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट की मजबूत मांग ने इस ग्रोथ को सपोर्ट किया।
निवेश से जुड़ा हिस्सा मजबूत
कैपिटल गुड्स उनमें 14.6 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई। इन्हें निवेश गतिविधि का संकेत माना जाता है। यह बताता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और नई क्षमता बनाने पर खर्च जारी है।
इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में भी 6.7 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई।
कंज्यूमर डिमांड अभी भी कमजोर
दूसरी तरफ, कंज्यूमर से जुड़े सेक्टर्स में सुस्ती बनी हुई है। कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स में सिर्फ 1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
इसका मतलब है कि रोजमर्रा के सामान की मांग अभी भी ज्यादा मजबूत नहीं हुई है।
IIP यानी इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, एक ऐसा सूचकांक है जो बताता है कि देश में मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली जैसे सेक्टर कितना उत्पादन कर रहे हैं।
IIP ग्रोथ का मतलब है कि पिछले साल के मुकाबले इन सेक्टर्स का आउटपुट कितना बढ़ा या घटा। इसे देखकर अर्थव्यवस्था की इंडस्ट्रियल सेहत का अंदाजा लगाया जाता है।