रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने 21 जुलाई को कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (JFS) को अलग करने का काम ट्रैक पर है। इसके लिए जरूरी एप्रूवल लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी इंडिया में फाइनेंशियल इनक्लूजन में मदद करेगी। फाइनेंशियल इनक्लूजन का मतलब आबादी के उस हिस्से को बैंकिंग सेवाओं के दायरे में लाना है, जो अभी इनसे दूर है। RIL के फाइनेंशियल रिजल्ट्स की रिलीज में अंबानी ने ये बातें कही हैं।
इंश्योरेंस, डिजिटल पेमेंट और एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल्स में उतरने का प्लान
अंबानी ने कहा कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज इंडिया में फाइनेंशियल इनक्लूजन को बढ़ाने की मजबूत स्थिति में है। रिलायंस ने अक्टूबर 2022 में कहा था कि वह अपने फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस-रिलायंस स्ट्रेटेजिक इनवेस्टमेंट्स को अलग करेगी। इसे Jio Financial Services नाम दिया जाएगा। यह कंपनी मुख्य रूप से एनबीएफसी मार्केट और क्रेडिट मार्केट सेगमेंट में ऑपरेट करती है। इसने इंश्योरेंस, डिजिटल पेमेंट और एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल्स में उतरने का प्लान बनाया है।
कंपनी की लीडरशिप टीम बहुत मजबूत
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों को हर एक शेयर पर जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का एक शेयर मिलेगा। दिग्गज बैंकर केवी कामत इसके नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन होंगे। ईशा अंबानी को कंपनी का नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। हितेश सेठिया जियो फाइनेशियल सर्विसेज के नए सीईओ और एमडी होंगे। वह आईसीआईसीआई बैंक में सीनियर पॉजिशन पर रह चुके हैं। हाल में State Bank of India (SBI) के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर पद से इस्तीफा देने वाले चरनजीत सिंह अटरा को जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का चीफ ऑपरेटिंग अफसर नियुक्त किया गया है। LinkedIn पर उनकी प्रोफाइल में इस बदलाव को अपडेट कर दिया गया है।
फाइनेंशियल सर्विसेज मार्केट में उथलपुथल की उम्मीद
जियो फाइनेंशियल की लीडरशिप टीम के कई सेक्टर में कंपनी की ग्रोथ को मजबूती देने की उम्मीद है। इंडिया में एनबीएफसी सेक्टर का लगातार विस्तार हो रहा है। कंसल्टेंसी फर्म EY India के पार्टनर एंड नेशनल लीडर (फाइनेंशियल सर्विसेज) Abizer Diwanji ने सीएनबीसी-टीवी18 को बताया कि जियो फाइनेंशियल के इंडिया के फाइनेंशियल सर्विसेज मार्केट में उथलपुथल मचाने की संभावना है। हालांकि, इस बारे में अभी बहुत कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन रिलायंस ने एक ग्रुप के रूप में ज्यादातर बिजनेसेज में उथलपुथल मचाई है। उन्होंने कहा कि हमे रिटेल, पेट्रोकेम, टेलीकॉम में ऐसा देख चुके हैं। अब फाइनेंशियल सर्विसेज में ऐसा देखने को मिल सकता है।