नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने सोमवार 15 मई को लीज पर विमान देने वाली कंपनियों की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें गो फर्स्ट (Go First) की दिवालिया याचिका को स्वीकार करने के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश को चुनौती दी गई थी। NCLAT ने कहा कि वह 22 मई को इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। इससे पहले कर्ज में डूबी एयरलाइन के अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स ने आज सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि लेसर्स ने गो फर्स्ट की ओर से दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की योजना के ऐलान के बाद 'टर्मिनेशन लेटर' जारी किए। इन लेटर्स का मकसद इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC) की प्रक्रिया को विफल बनाना है।
बता दें गो फर्स्ट को लीज पर विमान देने वाली कंपनियों ने एयलाइन के स्वैच्छिक दिवालिया याचिका को स्वीकार करने के NCLT के आदेश को चुनौती दिया है। इसमें SMBC एविएशन कैपिटल भी शामिल है। बता दें कि लीज पर विमान देने वाली कंपनियों को 'लेसर्स' कहा जाता है।
लेसर्स ने बीते 12 मई को दलील दिया था कि कर्ज में डूबी गो-फर्स्ट इस दिवालिया कार्यवाही का इस्तेमाल उन विमानों को अपने पास बनाए रखने के लिए कर रही है, जो उसकी हैं ही नहीं।
SMBC ने याचिका में गो-फर्स्ट के खुद से दिवालिया याचिका दाखिल करने के फैसले पर भी सवाल उठाया है। खासकर यह देखते हुई कि याचिका दाखिल करते समय उसकी 26 विमानें चालू हालत में थी और वह ग्राहकों से आगे की तारीख के लिए इनकी बुकिंग भी ले रही थी।
SMBC एविएशन ने दावा किया है कि गो फर्स्ट पर उसका करीब 700 से 800 करोड़ रुपये बकाया है। SMBC ने यह भी तर्क दिया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने उन्हें मामले में अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया और पूरी स्थिति का पता लगाए बिना गो फर्स्ट की दिवालिया याचिका को स्वीकार कर लिया।
वहीं GV एविएशन ने तर्क दिया कि गो फर्स्ट इस दिवालिया कार्यवाही का इस्तेमाल करके विमानों के ऊपर अपने अधिकार को बनाए रखने की कोशिश कर रही है और यह लेसर्स के अधिकारों का अतिक्रमण करता है।
SFV एयरक्राफ्ट होल्डिंग्स ने तर्क दिया कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने लेसर्स से कहा है कि मोरोटोरिम अवधि के चलते विमानों का रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं किया जा सकता है।