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CCI के खिलाफ Google की अपील पर 28 नवंबर से सुनवाई करेगा NCLAT

कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अपने ऑर्डर में गूगल पर 936 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कॉम्पिटिशन कमीशन का कहना है कि गूगल ने प्लेस्टोर इकोसिस्टम में अपनी बेहतर पोजिशन का गलत इस्तेमाल किया। NCLAT का यह भी कहना था कि इस अपील के खिलाफ स्टार्टअप कंपनियां 4 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकती हैं। ट्राइब्यूनल ने सीसीआई के ऑर्डर के खिलाफ गूगल को तत्काल राहत देने से मना कर दिया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 25, 2023 पर 6:35 PM
CCI के खिलाफ Google की अपील पर 28 नवंबर से सुनवाई करेगा NCLAT
कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया ने 25 अक्टूबर, 2022 को गूगल पर जुर्माना लगाया था।

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) ने 25 सितंबर को कहा कि वह कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के खिलाफ गूगल (Google) की अपील पर 28 नवंबर से सुनवाई करेगा। CCI ने अपने ऑर्डर में गूगल पर 936 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कॉम्पिटिशन कमीशन का कहना है कि गूगल ने प्लेस्टोर इकोसिस्टम में अपनी बेहतर पोजिशन का गलत इस्तेमाल किया।

NCLAT का यह भी कहना था कि इस अपील के खिलाफ स्टार्टअप कंपनियां 4 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकती हैं। ट्राइब्यूनल ने सीसीआई के ऑर्डर के खिलाफ गूगल को तत्काल राहत देने से मना कर दिया था और मामले की सुनवाई अप्रैल 2023 में तय की थी। गूगल ने NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन बाद में कंपनी ने मामला वापस ले लिया था।

कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया ने 25 अक्टूबर, 2022 को गूगल पर यह जुर्माना लगाया था। कॉम्पिटिशन कमीशन का कहना था कि गूगल ने अपने प्ले स्टोर पर ऐप्लिकशन की खरीदारी के लिए ऐप्लिकेशन डिवेलपर्स को थर्ड पार्टी बिलिंग या पेमेंट प्रोसेसिंग सर्विसेज का इस्तेमाल करने पर रोक लगा रखी है। गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) डिजिटल डिस्ट्रिब्यूशन सर्विस है, जहां से मोबाइल ऐप्लिकेशन डाउनलोड किए जाते हैं।

सीसीआई का कहना था कि प्ले स्टोर के ऐक्सेस के लिए ऐप्लिकशन डिवेलपकर्स को गूगल प्ले बिलिंग सिस्टम (GPBS) के इस्तेमाल के लिए मजबूर करना अनुचित है। कमीशन का यह भी कहना था कि गूगल अपने ही ऐप्लिकशन YouTube के लिए GPBS का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, लिहाजा वह इस मामले में भेदभाव कर रहा है। एंट्री-ट्रस्ट रेगुलेटर का यह भी कहना था कि GPBS को जबरन लागू करना इनोवेशन के लिहाज से ठीक नहीं है और इससे पेमेंट प्रोसेसर्स और ऐप डिवेलपर्स की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।

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