देश की फार्मा इंडस्ट्री नई एक्सपोर्ट गाइडलाइंस में छूट चाहती है। इसके लिए इंडस्ट्री ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से गुहार लगाई है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, फार्मा कंपनियों ने संकेत दिया है कि नए नियम सालाना एक्सपोर्ट में लगभग 3 अरब डॉलर का नुकसान तत्काल रूप से पहुंचा रहे हैं। उद्योग ने यह भी तर्क दिया है कि फार्मा एक्सपोर्ट को लेकर DCGI के नए नियम मौजूदा और भविष्य के कॉन्ट्रैक्ट दोनों के लिए बाधा बन रहे हैं।
सूत्रों ने CNBC-TV18 को बताया है कि DCGI ने फार्मा प्रोडक्ट्स के लिए एक्सपोर्ट गाइडलाइंस में संशोधन किया है। 7 मार्च 2025 को जारी किए गए नए मानदंडों के तहत कंपनियों को प्रोडक्ट इंपोर्ट करने वाले देश से पहले नेशनल रेगुलेटरी अप्रूवल हासिल करना होगा। इस अप्रूवल के आधार पर वे DCGI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसके बिना एक्सपोर्ट आगे नहीं बढ़ सकता।
सभी देशों के पास रेगुलेटरी अप्रूवल के लिए नहीं है सिस्टम
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का यह भी कहना है कि फार्मा इंडस्ट्री ने DCGI के साथ अपनी चर्चा में इस अनिवार्य मानदंड में छूट मांगी है। उद्योग का तर्क है कि इंपोर्ट करने वाले सभी देशों के पास इंपोर्ट से पहले रेगुलेटरी अप्रूवल जारी करने के लिए सिस्टम या प्रोसेस नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, "यमन, घाना और रवांडा जैसे कई देशों में नेशनल रेगुलेटरी अप्रूवल जारी करने का कोई सिस्टम नहीं है, जो NOC के लिए जरूरी है।"
सूत्रों ने यह भी कहा है कि DCGI का कहना है कि संशोधित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य एक्सपोर्ट की प्रोसेस को सुव्यवस्थित करना है। नए दिशा-निर्देश रेगुलेटरी निरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इतना ही नहीं DCGI का मानना है कि नए फार्मा निर्यात मानदंड भारतीय रेगुलेशंस को लेटेस्ट ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बनाते हैं। वे घरेलू सुरक्षा और जिम्मेदार एक्सपोर्ट प्रैक्टिसेज को भी सुनिश्चित करते हैं।