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रूस के सस्ते क्रूड से प्राइवेट रिफाइनिंग कंपनियां मालामाल, फिर सरकारी ऑयल कंपनियों को क्यों हो रहा लॉस?

सरकार तेल कंपनियों को जून तिमाही में लॉस हो सकता है। इसकी वजह यह है कि महंगे भाव पर क्रूड खरीदने के बावजूद वे कम कीमतों पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं। बढ़ते इनफ्लेशन को देखते हुए वे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें नहीं बढ़ा पा रही हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 03, 2022 पर 10:04 AM
रूस के सस्ते क्रूड से प्राइवेट रिफाइनिंग कंपनियां मालामाल, फिर सरकारी ऑयल कंपनियों को क्यों हो रहा लॉस?
सरकारी तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल की बिक्री पर 17 रुपये और डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर 20 रुपये का लॉस हो रहा है।

रूस का सस्ता क्रूड प्राइवेट रिफाइनिंग कंपनियों के लिए वरदान बन गया है। उधर, सरकारी रिफानिंग कंपनियां दबाव में है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और नायरा (Nayara) रूस से सस्ता तेल खरीदने में सबसे आगे हैं। दोनों ने सस्ते भाव पर क्रूड खरीदा है और रिफानिंग के बाद महंगे भाव पर एक्सपोर्ट किया है। इस तरह उन्होंने खूब मुनाफा कमाया है।

उधर, सरकारी रिफाइनिंग कंपनियां (IOC, HPCL, BPCL) महंगे भाव पर क्रूड खरीदने के लिए मजबूर हैं। इसके अलावा उन्हें कम भाव पर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल बेचना पड़ता है। इससे वे काफी दबाव में हैं। सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों ने रूस से बहुत कम क्रूड खरीदा है। इसकी वजह यह है कि ये ज्यादातर सालाना डील के तहत क्रूड खरीदती हैं।

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इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि सरकार तेल कंपनियों को जून तिमाही में लॉस हो सकता है। इसकी वजह यह है कि महंगे भाव पर क्रूड खरीदने के बावजूद वे कम कीमतों पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं। बढ़ते इनफ्लेशन को देखते हुए वे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें नहीं बढ़ा पा रही हैं। अप्रैल की शुरुआत से पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। उधर, रिलायंस जैसी प्राइवेट कंपनियों को घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री करने का दबाव नहीं है। वे अपने ज्यादातर प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट करती हैं।

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