Race For RCB: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की मालिकाना हक वाली कंपनी, 'रॉयल चैलेंजर्स स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' (RCSPL) को खरीदने की होड़ तेज हो गई है। मनीकंट्रोल को मिली जानकारी के अनुसार, 2 फरवरी तक गैर-बाध्यकारी बोलियां (Non-binding bids) जमा करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। इस रेस में भारत के दो बड़े अरबपति मनीपाल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. रंजन पई और सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला शामिल हैं। इनके अलावा वैश्विक इन्वेस्टमेंट दिग्गज EQT और बेंगलुरु स्थित प्रेमजी इन्वेस्ट ने भी स्वतंत्र बोलियां पेश की हैं। दरअसल Diageo की सहायक कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स अपने इस व्यवसाय को बेचने की रणनीतिक समीक्षा कर रही है, जिसे 31 मार्च, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
कितनी वैल्यूएशन की है डिमांड?
आरसीबी की बिक्री के लिए डियाजियो ने $2 बिलियन (करीब 16,600 करोड़ रुपये) की मांग रखी है, जबकि संभावित खरीदार इसकी वैल्यूएशन $1.5 बिलियन से $1.7 बिलियन के बीच लगा रहे हैं। डॉ. रंजन पई इस सौदे के लिए अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी दिग्गज KKR और Temasek के साथ मिलकर एक कंसोर्टियम बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। वहीं, अदार पूनावाला को TPG कैपिटल का समर्थन मिलने की चर्चा है। प्रेमजी इन्वेस्ट पूरी 100% हिस्सेदारी के बजाय बहुमत हिस्सेदारी खरीदने में रुचि दिखा रहा है। आने वाले एक हफ्ते के भीतर बोली लगाने वालों की एक 'शॉर्टलिस्ट' तैयार की जाएगी, जिसके बाद विस्तृत जांच-पड़ताल शुरू होगी।
आईपीएल की अन्य टीमों में भी हिस्सेदारी बेच-खरीद की है हलचल
आईपीएल की दुनिया में केवल आरसीबी ही नहीं, बल्कि अन्य टीमें भी निवेश जुटाने में लगी हैं। राजस्थान रॉयल्स $1 बिलियन से अधिक की वैल्यूएशन पर बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है, जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में मेहता ग्रुप अपनी अल्पसंख्यक हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा है। हाल ही में टॉरेंट ग्रुप ने गुजरात टाइटन्स में 67% हिस्सेदारी लगभग $833 मिलियन में खरीदी थी। इन सौदों के पीछे की बड़ी वजह आईपीएल की बढ़ती ब्रांड वैल्यू है, जो 2025 की स्टडी के अनुसार $18.5 बिलियन तक पहुंच गई है। आरसीबी वर्तमान में $269 मिलियन की ब्रांड वैल्यू के साथ चार्ट में सबसे ऊपर है।
क्यों है आईपीएल निवेशकों की पहली पसंद?
निवेशकों के लिए आईपीएल एक 'कैश मशीन' की तरह है क्योंकि इसमें आय का जरिया (मीडिया राइट्स और स्पॉन्सरशिप) पहले से तय और सुरक्षित होता है। दुनिया की अन्य लीगों (जैसे NBA या EPL) के विपरीत, आईपीएल में खिलाड़ियों की सैलरी पर एक निश्चित सीमा होती है, जिससे टीमों का खर्च नियंत्रण में रहता है। साथ ही स्टेडियम के बुनियादी ढांचे का रखरखाव बीसीसीआई द्वारा किया जाता है, जिससे फ्रेंचाइजी को भारी निवेश की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि ब्लैकस्टोन, कार्लाइल और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) जैसे वैश्विक नाम भी इस रेस में शामिल होने की संभावना तलाश रहे हैं।