अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाए जाने की संभावना कम है और वह अपनी अगली बैठक में इसे 0.25% और बढ़ा सकता है। ये कहना है भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का। हमारे सहयोगी न्यूज चैनल CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में रघुराम राजन ने कहा कि अमेरिका में कोर महंगाई अभी भी मजबूत दिख रही है। उन्होंने कहा, "ठीक है, मुझे लगता है कि अमेरिका में, कम से कम इस समय ऐसा लगता है कि फेड ने अपने स्तर से सभी प्रयास कर लिए हैं। इस समय अमेरिका में मुख्य रूप से दो चिंताएं हैं। पहला कि वहां कई छोटे और मझोले स्तर के बैंक अपने बॉन्ड पोर्टफोलियो पर घाटे में बैठे हैं। इनमें से कई लंबी अवधि के बॉन्ड रखते हैं जिनकी वैल्यू में फेड की दर में बढ़ोतरी के साथ गिरावट आई है।"
उन्होंने कहा, "दूसरा कारण यह है कि इनमें से कई के पास बिना-बीमा वाले डिपॉजिटर्स है। इन दोनों कारण के एक साथ आने पर काफी खतरा हो जाता है। सिलिकन वैली बैंक के फेल होने के बाग ऐसे डिपॉजिटर्स के बीच चिंता बढ़ी है। उन्हें डर है कि बैंक के डूबने पर उनका पैसा फंस जाता है।"
रघुराम राजन ने कहा, " अब जो प्रयास किया जा रहा है वह दोनों पक्षों को आश्वस्त करने का है। एक तरफ तो बैंकों को कहा जा रहा है कि आप अपनी संपत्तियों के पूरे मूल्य के बदले उधार ले सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ डिपॉजिटर्स को कहा जा रहा है कि भागो मत.. हमने आपको कवर कर लिया है।"
RBI के पूर्व गवर्नर ने कहा, "उम्मीद है कि ये प्रयास चिंताओं को शांत करने के लिए पर्याप्त होना चाहिए। लेकिन आप जानते हैं बैंकिंग सेक्टर में घबराहट ऐसी चीज है, जो पहले भी हो चुकी है। इसलिए मेरी अगर किसी छोटे बैंक में बड़ी जमा राशि है, तो मैं अभी भी कह सकता हूं कि देखों में सरकार के भरोसे नहीं निर्भर रहना चाहता। मुझे अपना पैसा जेपी मॉर्गन या सिटी बैंक जैसे बड़े बैंक में ले जाने दें और यह जारी रह सकता है। इसलिए फेड को देखना होगा कि क्या हो रहा है।"
राजन ने कहा, "कल जो सीपीआई रिपोर्ट आई, वह सहज नहीं है। रिटेल महंगाई में कमी के बावजूद अमेरिका में कोर महंगाई अभी भी मजबूती से चल रही है। रिटेल महंगाई में कमी लाना आसान हिस्सा था। इसके लिए सप्लाई चेन के मोर्च पर कुछ सुधार करने थे। असल मुश्किल अब इस महंगाई दर को 2-2.5 प्रतिशत तक ले जाना है।"